“स्वामी जी का रहस्यमय उद्बोधन: गोमाता के प्रति हमारी जिम्मेदारी और पंचायतों की निर्णायक भूमिका” – “गोमाता की उपेक्षा का परिणाम भयावह होगा ! स्वामी जी ने दी चेतावनी”

⏩ "गोमाता के नाम पर छलावा या सच्ची सेवा? स्वामी जी ने खोले गौशालाओं के प्रबंधन के राज!"गोमाता पूजनीय: पशु नहीं, देवताओं की तीर्थ
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर। गोमाता पशु या जानवर नहीं है, वह सब देवताओं की भी देवता एवं तीर्थ हैं, और मां रूपी गोमाता को हम सरकार के भरोसे छोड़ देते है, क्या जब हमारी जन्म देने वाली मां वृद्ध हो जाती है ,तो उसे हम सरकार के भरोसे छोड़ते है क्या ? उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 297 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने जनपद सुसनेर में पंचायत स्तर पर संचालित सभी पंचायत स्तरीय गौशालाओं के संचालन मंडल,पंच, सरपंच ,सचिव एवं युवाओ को प्रबंधन का पाठ पढ़ाते हुए कही। स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने कहा कि गोमाता केवल पशु नहीं, बल्कि देवताओं की भी तीर्थ हैं। जिस प्रकार हम अपनी वृद्ध माता को सरकार के भरोसे नहीं छोड़ते, वैसे ही गोमाता की जिम्मेदारी भी हमारी है। ग्राम पंचायत स्तर पर बनी गौशालाओं का बेहतर संचालन पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं की सहभागिता से होना चाहिए। स्वामी जी ने पंचायतों से आह्वान किया कि वे इसे जिम्मेदारी से निभाएं।
⏩ गोचर भूमि को कब्जामुक्त कराएं: स्वामी जी का सुझाव :: ग्राम पंचायतों को चाहिए कि वे अपनी गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराएं और उसमें हरा चारा एवं सहजन के वृक्ष लगाएं, जिससे गौमाता को पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सके। गांव में हर घर से एक रोटी गोशाला के लिए एकत्र करने की परंपरा शुरू होनी चाहिए, जिससे गौमाताओं के आहार की व्यवस्था आसानी से हो सके।
⏩ धार्मिक आयोजनों में गोसेवा का प्रावधान हो :: पूर्व में धार्मिक आयोजनों में गोमाता के नाम पर धन निकाला जाता था। इसे फिर से लागू किया जाना चाहिए, जिससे गोसेवा को आर्थिक मजबूती मिले।स्वामी जी ने चिंता जताई कि मालवा का चारा राजस्थान में बिकता है और फिर हमें ऊंची कीमतों पर खरीदना पड़ता है। पंचायत स्तर पर योजना बनाकर चारे की स्थानीय व्यवस्था करनी चाहिए।
⏩ युवाओं को आगे आना होगा: गोसेवा में सक्रिय भागीदारी जरूरी:: हर ग्राम पंचायत में 10-15 युवाओं की टीम बनाई जाए जो गोसेवा में योगदान दे, जिससे गौशालाओं की स्थिति बेहतर हो सके।
⏩ स्वामीजी ने बताया कि गो तस्करों के अभी भी हौसले बुलन्द है और फिर आज प्रातः 04 बजे 04 बजे पिड़ावा से डग की ओर जा रही बोलेरो गाड़ी में 07 गोवंश के हाथ पैर एवं मुंह बांधकर ऊपर से 50 कैरेट खाली रखकर उसके आगे एक मारुति वेन पेट्रोलिंग करके जाते समय गो सेवक धर्मेंद्र सिंह राजपूत, टीकम सिंह राजपूत गो रक्षा दल आगर, जुआन सिंह,,कैलाश जी लोहार, करण सिंह जी,नेपाल सिंह जी गो रक्षा दल डग , बहादुर सिंह जी बांसखेड़ी पिड़ावा ने उक्त गोवंश से भरे वाहन को रुकवाने का प्रयास किया तो पेट्रोलिंग वाहन एवं पिकअप वाहन से गो रक्षकों पर कई राउंड फायरिंग की गई और अंत में डग में एक गो तस्कर मोमंडन एवं गोवंश से भरे वाहन को पकड़कर डग थाने में लाकर मुकदमा दर्ज करवाकर उन नंदियों को पुलिस थाना डग के प्रधान आरक्षक मुक्ति लाल जी पप्पू लाल जी सेन के साथ गो अभयारण्य लेकर आएं।
⏩ गौसेवा की दृष्टि से जनपद सुसनेर में श्रेष्ठ कार्य करने वाली डोंगरगांव पंचायत के प्रेम सिंह सोनगरा, भंवर सिंह जोदाना,महेश पाटीदार,मोहनलाल सेन एवं पुरूषोतम शर्मा व ग्राम पंचायत बराई से राजेन्द्र सिंह राजपूत जो अपने खर्चे से 80 गौमाताओं की सेवा कर रहें है, उन्हे गोमाता की छवि देकर सम्मानित किया ।
⏩ 297 वें दिवस पर राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रामस्नेही संप्रदाय के सागवाड़ा के रामद्वारा से पूज्य सन्त उदयराम जी महाराज एवं श्री लालता प्रसाद तिवारी (लालू महाराज) निस्वार्थ गौ सेवा समिती, गंज बासौदा त्यौंदा रोड ,पुरानी मंडी के सामने, गंजबासौदा जि. विदिशा (म.प्र.),बलवीर रघुवंशी (सह गौ सेवक) संदीप रघुवंशी (सह गो सेवक) एवं वरिष्ठ गोसेवक गोपाल सैनी एवं ग्वाल सेना के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रामनारायण सैनी आदि अतिथि उपस्थिiत रहें ।

⏩ 297 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के सुसनेर जनपद की और से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 297 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के सुसनेर जनपद की और से कार्यपालन अधिकारी राजेश शाक्य,जनपद की सभी ग्राम पंचायतों के पंच, सरपंच ,सचिव,सहायक सचिव एवं युवाओं की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



