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देशभक्ति और धर्म का अनूठा संगम: जब कवि प्रदीप और लता मंगेशकर का दिवस बना गौ आराधना का संदेश


निष्काम भावनाओ से ही राष्ट्र की रक्षा व राष्ट्र की उन्नति हो सकती है - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क, सुसनेर।
आज का दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के लिए एक विशेष संयोग लेकर आया है। आज ही के दिन अमर देशभक्ति गीत "ए मेरे वतन के लोगों" के रचयिता कवि प्रदीप जी का जन्म हुआ था, और इसी दिन इस गीत को अमर करने वाली लता मंगेशकर जी का निर्वाण हुआ था। यह संयोग केवल एक तिथि का मेल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रभक्ति के गहरे संबंध को दर्शाता है।
इसी पावन अवसर पर एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 304वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने गौमाता की महिमा का बखान करते हुए राष्ट्र रक्षा और सनातन धर्म में गौसेवा की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि एक दिव्य संगम है, जिसके माध्यम से संस्कृति, धर्म और राष्ट्र की रक्षा सहजता से की जा सकती है।
स्वामीजी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में करोड़ों सनातनी होने के बावजूद लाखों गौमाताएँ दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए सवाल उठाया—जितनी भीड़ चाय-कॉफी की दुकानों, भांग और शराब के अड्डों पर दिखती है, क्या उतनी भीड़ कभी बादाम की दुकान पर नजर आई? यह उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि अच्छी चीजों की कद्र करने वाले लोग गिने-चुने ही होते हैं।
गौसेवा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि राष्ट्र रक्षा का एक सशक्त माध्यम भी है। यह स्वस्थ जीवन, सद्गुण और निष्काम भावनाओं को जन्म देती है, जिससे राष्ट्र की उन्नति होती है। स्वामीजी ने आह्वान किया कि जो गौसेवा के कार्य में लग गया, वही सच्चा राष्ट्रभक्त है।

गौमाता के बिना राष्ट्र का विकास अधूरा, सनातन धर्म की परिकल्पना असंभव— इस संदेश के साथ गो आराधना महोत्सव का यह दिव्य आयोजन आज राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति की धरोहर के प्रति जनजागरण का माध्यम बना।

⏩ ग्वाल शक्ति सेना में 5 हजार पूर्ण गोव्रती कार्यकर्ताओं की श्रृंखला में मुकेश गुर्जर
ग्राम सिरकम्बा सयोजक जिला हरदा एवं महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से उमरखेड़ी तहसील सुमीत वानखेडे की नियुक्ति की उद्घोषणा हुई । श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा ,कामधेनु गो अभयारण्य ,धेनु देवी फाउंडेशन एवं दृष्टिदेवी फाउंडेशन के तत्वाधान में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें ग्वाल प्रशिक्षण शिविर के छठे दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा से पधारे गोसेवा प्रभारी श्री गिरधर सिंह ने श्रेष्ठतम गौसेवा किस प्रकार हो उसका प्रशिक्षण दिया ।

⏩ 304 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 304 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के इन्दौर से देवकीनंदन शर्मा श्रीमती आकांक्षा शर्मा ,संतोष शर्मा एवं राजस्थान के झालावाड़ से श्रीमती चेतना भरत शर्मा ने अपने परिवार सहित सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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