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MP CRIME : “प्रेम के नाम पर क़त्ल! पत्नी प्रेमबाई की हत्या, पति और सास को उम्रकैद”। – “जानिए कैसे एक छोटे विवाद ने उजाड़ दी थी ‘प्रेम’ की दुनिया?”

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर। तहसील के ग्राम पिपलिया नानकार में एक छोटे से विवाद ने प्रेमसिंह और प्रेमबाई के रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। पत्नी के बिना बताए घर से जाने की बात पर पति इतना आगबबूला हो गया कि उसने लकड़ी से वार कर अपनी ही जीवन संगिनी की हत्या कर दी। इस खौफनाक कृत्य में उसकी मां, यानी मृतका की सास, भी शामिल थी। न्यायालय ने त्वरित सुनवाई करते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

🔴 छोटी सी बात, बड़ा हादसा :: यह मामला 15 जनवरी 2024 का है, जब प्रधान आरक्षक हेमंतसिंह सिसोदिया ने थाना सुसनेर पर धारा 302 के तहत अपराध दर्ज किया। शिकायतकर्ता मेहरबानसिंह सौंधिया ने पुलिस को बताया कि उसका भाई प्रेमसिंह उसे सुबह मिला और बताया कि रात को बिना बताए घर से जाने को लेकर पत्नी प्रेमबाई से विवाद हो गया था। गुस्से में आकर उसने लकड़ी से वार किया, जिससे पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई।

🔴 पुलिस की त्वरित कार्रवाई :: थाना सुसनेर में अपराध क्रमांक 14/24 के तहत धारा 302, 323, 34 भादवि के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। इस दौरान निरीक्षक अनिल कुमार मालवीय, उपनिरीक्षक दीपक विश्वकर्मा और सहायक उपनिरीक्षक गोविंद सिंह ने मामले की बारीकी से जांच की। कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक आशीष सोनी, थाना मुंशी रामेश्वर यादव और सहायक ग्रेड-03 कृष्णकांत अग्रवाल ने भी अहम भूमिका निभाई।

🔴 न्यायालय का फैसला :: सुसनेर अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश पंकज कुमार वर्मा ने अतिरिक्त लोक अभियोजक मुकेश जैन चौधरी के ठोस तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी पति प्रेमसिंह और सास कमलाबाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

🔴 क्या प्रेम का यही अंजाम था?
- संयोग देखिए, पति का नाम प्रेमसिंह और पत्नी का नाम प्रेमबाई था, लेकिन उनके बीच प्रेम नाम की कोई चीज नहीं बची। अगर प्रेमसिंह ने गुस्से की बजाय प्रेम से पत्नी को समझाया होता, तो शायद यह दिल दहला देने वाली घटना न होती। अब कानून ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है—छोटी-छोटी बातों को हल्के में न लें, क्योंकि कभी-कभी वही जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाती हैं।

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