▪️”जहां उम्मीदें खत्म हुईं, वहां से झालावाड़ ने रचा इतिहास !”▪️”जब बड़े अस्पतालों ने हार मानी, तब डॉ. योगी ने रचा इतिहास – झालावाड़ राज. के सरकारी अस्पतालों में पहली ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी सफल!”

"जिसे बड़े अस्पतालों ने नकारा, उसे झालावाड़ में मिला नया जीवन! "जयपुर और कोटा में असंभव मानी गई सर्जरी, डॉक्टर योगी ने कर दिखाया कमाल
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क झालावाड़ :: मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग ने चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी और उनकी टीम ने राजस्थान के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार ब्रेकियल प्लेक्सस नर्व ट्रांसफर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि झालावाड़ अब चिकित्सा के क्षेत्र में किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं है।

🔥जब जयपुर और कोटा के डॉक्टरों ने कहा ‘संभव नहीं’, तब झालावाड़ के डॉक्टरों ने किया कमाल :: सितंबर 2024 में कोटा निवासी 29 वर्षीय मानसिंह का भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें उसका बायां पैर काटना पड़ा और हाथ पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। कोटा मेडिकल कॉलेज से जयपुर एसएमएस अस्पताल रेफर किए गए मरीज को वहां के विशेषज्ञों ने जवाब दे दिया और कहा कि ब्रेकियल प्लेक्सस की नसें ठीक नहीं हो सकतीं। मरीज की छुट्टी कर दी गई और परिवार निराश हो गया। लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग में नई आशा जगी। जब मरीज को यहां लाया गया, तो डॉ. रामसेवक योगी ने चुनौती स्वीकार करते हुए ऑपरेशन का निर्णय लिया। परिजनों की सहमति के बाद, राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में पहली बार ब्रेकियल प्लेक्सस नर्व ट्रांसफर सर्जरी की गई।

🔥 चिकित्सा जगत में नया इतिहास रचने वाले डॉक्टर योगी ::
डॉ. रामसेवक योगी, एक ऐसा नाम जो चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार और समर्पण का पर्याय बन चुका है। अपनी अद्वितीय प्रतिभा, अथक परिश्रम और असाधारण कौशल के बल पर उन्होंने झालावाड़ को न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में एक नई पहचान दी है। सीमित संसाधनों में भी असंभव को संभव करने की उनकी क्षमता ने यह साबित कर दिया कि कुशल चिकित्सक सिर्फ इलाज ही नहीं करते, बल्कि नए जीवन की रोशनी भी देते हैं। उनके नेतृत्व में झालावाड़ अब चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है।

🔥कैसे किया गया ऑपरेशन? :: यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी, जिसमें स्पाइनल असेसरी नर्व (केनियल नर्व-11) को सुप्रास्केपुलर नर्व से जोड़ा गया। इससे कंधे की मांसपेशियों को दोबारा सक्रिय किया गया। साथ ही, इंटरकोस्टल नसों (सीने की नसें) को मस्कुलोक्यूटीनियस नर्व (हाथ की नस) से जोड़ा गया, जिससे हाथ को दोबारा क्रियाशील बनाने की कोशिश की गई।

🔥ऑपरेशन के बाद मरीज में सुधार की झलक :: सर्जरी के बाद अब मरीज अपने हाथ से हल्का मूवमेंट कर पा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि रीहैबिलिटेशन के बाद वह स्वयं अपना काम कर सकेगा। झालावाड़ जैसे जिला अस्पताल में इस तरह की सर्जरी अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
🔥 इस सफलता के नायक: ऑपरेशन करने वाली टीम :: इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में शामिल थे:
🔹न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष: डॉ. रामसेवक योगी
🔹निश्चेतना विभागाध्यक्ष: डॉ. राजन नंदा
🔹सहा. चिकित्सक : डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. सुधीर शर्मा
🔹स्टाफ: कीर्ति मित्तल, कन्हैया लोहार, रोहित कश्यप
🔥झालावाड़ बना न्यूरो सर्जरी का नया केंद्र :: इस सफलता के साथ, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अब न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में प्रदेश में नया आयाम जोड़ रहा है। जब जयपुर और कोटा के विशेषज्ञ हार मान चुके थे, तब झालावाड़ के डॉक्टरों ने यह कर दिखाया।

🔥 अन्य संभावनाएं और भविष्य की उम्मीदें :: डॉ. योगी और उनकी टीम की यह सफलता केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि झालावाड़ के चिकित्सा क्षेत्र के लिए नए द्वार खोलने वाली है। आने वाले समय में यहां और भी जटिल न्यूरो सर्जरी की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे प्रदेशभर के मरीजों को इलाज के लिए महानगरों में जाने की जरूरत नहीं होगी।



