▪️”RTI कार्यकर्ताओं के लिए सूचना का अधिकार या प्रताड़ना का हथियार? पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट!”

▪️लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल! सूचना मांगने पर आदेशात्मक भाषा और प्रताड़ना का आरोप
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क उज्जैन :: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासनिक दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) उज्जैन मंडल का है, जहाँ RTI कार्यकर्ता श्री रोहित कुमार गुप्ता को सूचना मांगने के बाद न केवल आदेशात्मक भाषा में पत्र जारी किया गया, बल्कि जब वे विभागीय कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने उनके साथ असभ्य व्यवहार किया और उन्हें प्रताड़ित किया।
◾क्या है पूरा मामला? आगर-मालवा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता श्री रोहित कुमार गुप्ता ने लोक निर्माण विभाग, आगर-मालवा से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी मांगी थी। जवाब संतोषजनक न मिलने पर उन्होंने 31 दिसंबर 2024 को प्रथम अपील दायर की। इसके जवाब में 29 जनवरी 2025 को अधीक्षण यंत्री, उज्जैन मंडल द्वारा पत्र जारी कर 4 फरवरी 2025 को कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश दिया गया।


- ⏩ जब श्री गुप्ता विभागीय कार्यालय पहुंचे, तो क्या हुआ? अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया – अपीलकर्ता को बुलाया गया, लेकिन अधिकारी स्वयं अनुपस्थित थे।
- ◾सूचना नहीं दी गई – यदि अधिकारी उपस्थित नहीं थे, तो उन्हें अपीलकर्ता को पहले ही सूचना देनी चाहिए थी ताकि 250 किलोमीटर की यात्रा और खर्च व्यर्थ न जाता।
- ◾अनावश्यक दबाव और डराने की कोशिश – पत्र की भाषा नागरिकों को सशक्त करने के बजाय डराने और धमकाने वाली थी।
- ◾दस्तावेज पहले से संलग्न होने के बावजूद फिर से मांगना – इससे यह प्रतीत होता है कि विभाग जानबूझकर प्रक्रिया को कठिन बना रहा है।
🔴 PWD प्रमुख सचिव को लिखी गई शिकायत ::
PWD उज्जैन कार्यालय में हुई इस अन्यायपूर्ण घटना के बाद श्री रोहित कुमार गुप्ता ने प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग, भोपाल को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की मांग की।
◾शिकायत पत्र में उन्होंने बताया कि –
🔹RTI कानून का पालन विभाग में केवल दिखावे के लिए किया जा रहा है।
🔹लोक निर्माण विभाग के अधिकारी न केवल जानकारी देने में लापरवाह हैं, बल्कि प्रताड़ित भी कर रहे हैं।
🔹पहले भी विभाग के लेखाधिकारी मीणा द्वारा धमकी और अभद्रता की जा चुकी है।
🔹सूचना आयुक्त को शिकायत करने के बाद ही स्पीड पोस्ट से जानकारी भेजी गई, लेकिन गलत आचरण करने वाले अधिकारी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।🔹जब अधिकारी नागरिकों को सूचना देने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास करें, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

⏩ श्री गुप्ता ने पत्र में मांग की कि –1. लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को RTI अधिनियम 2005 का समुचित पालन करने के निर्देश दिए जाएं।2. आवेदनकर्ताओं को प्रताड़ित करने और आदेशात्मक भाषा के प्रयोग पर सख्त रोक लगाई जाए।3. अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए कि वे अपीलकर्ता की सुविधा का ध्यान रखें और अनावश्यक यात्रा से बचाने के लिए उचित संचार करें।
⏩ लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर सवाल! इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि PWD विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना के खिलाफ काम कर रहा है। जब एक सामाजिक कार्यकर्ता को अपनी ही सूचना के लिए संघर्ष करना पड़े, धमकाया जाए और प्रताड़ित किया जाए, तो यह लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर गंभीर प्रहार है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रमुख सचिव इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं? क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, या फिर RTI कार्यकर्ताओं को इसी तरह प्रताड़ित किया जाता रहेगा?



