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“स्वामी गोपालानंद सरस्वती का बड़ा सवाल – लोकतंत्र में गौपालन पर क्यों लग रहे हैं नियम-कायदे?” लोकतंत्र में गोमाता उपेक्षित या प्रतिबंधित? जानिए पूरी कहानी!”

भारत के बड़े महानगरों में कुत्ते,बकरी तो पाले जा सकते है लेकिन गोमाता नहीं - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर। जहां पल का भरोसा नहीं,जहां कल का भरोसा नहीं , ऐसी क्षण भंगूर दुनियां में अगर कोई काल निश्चित करके किसी कार्य को प्रारंभ करते है,तो उसके पीछे वस्तुत:असल में परमात्मा की ही कृपा होती है,वही प्रेरणा दे सकते है और देते है,परमात्मा के द्वारा आयोजित नियोजित एवं संयोजित देवताओं की भी देवता कहीं जाने वाली भगवती गोमाता की गोकृपा कथा कहने सुनने का अवसर भगवान ने हमें दिया है और आज हम 308 दिन में प्रवेश कर चुके है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के अवसर पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कही। स्वामीजी ने आगे बताया कि जिस भगवती गोमाता को पूरा ब्रह्माण्ड मां के रूप में पूजा करता है उस गोमाता की लोकतंत्र के जमाने में घोर उपेक्षा हो रहीं है क्योंकि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के बड़े बड़े महानगरों,शहरों में आप कुत्ता,बकरी तो पाल सकते है,लेकिन आप गोमाता को नहीं पाल सकते और आपने गलती से भी घर या कॉलोनी में गोमाता को पाल लिया तो नगर निकाय का प्रशासन गोपालक पर भारी जुर्माना कर उस गोमाता को अपने वाहनों में भरकर कही बाहर छोड़ देंगे । मैं देश के गोभक्तो से आग्रह करना चाहता हूं कि आप अपने शहर में एक ऐसी कॉलोनी बनाएं जिसमें प्रत्येक घर में एक गोमाता के लिए स्थान हो और उस कॉलोनी के हर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम में सर्व प्रथम गौपूजन हो उसके बाद ही सारे आयोजन हो और पूरी कॉलोनी व्यसन मुक्त एवं गोव्रती बने एक ऐसा वास्तविक गोकुल धाम बने और उस कॉलोनी में केवल गोप्रेमियो का ही प्रवेश हो गो विरोधी का प्रवेश निषेध हो।

⏩ स्वामीजी ने बताया कि आगामी 22 फरवरी से 27 फरवरी 2025 तक विश्व के इस प्रथम गो अभयारण्य में गोष्ठाधिपति भगवान गोपालेश्वर महादेव के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में महाशिवरात्रि के पुण्य पर्व पर विशाल मेले का आयोजन होगा जिसमें शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा,श्री राधा कृष्ण विवाह,दो कन्याओं का विवाह,श्री शिव कथा,गो कृपा कथा एवं अग्नि नृत्य जैसे विशाल आयोजन होंगे । एक वर्षीय गो कृपा कथा के 308 वें दिवस पर झालावाड़ जिले के पिड़ावा के ओसाव से गिरजाशंजर पंचोली, खारपाकलां से रामगोपाल पाटीदार, राजगढ़ के जीरापुर से चम्पा लाल सेन, मांगीलाल सेन, खैरासी से घनश्याम तोमर,भारत सिंह तोमर,विजय सिंह तोमर, कालू सिंह परमार, परचूखेड़ी हिन्दू सिंह आदि अतिथि के रूप में पधारे । श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा ,कामधेनु गो अभयारण्य ,धेनु देवी फाउंडेशन एवं दृष्टिदेवी फाउंडेशन के तत्वाधान में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें ग्वाल प्रशिक्षण शिविर के दशम दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा से पधारे गोसेवा प्रभारी श्री गिरधर सिंह ने नस्ल सुधार एवं गोवंश के लिए श्रेष्ठतम आहार प्रबन्धन के हेतु सभी को प्रशिक्षण दिया ।

⏩ 308 वे दिवस पर चुनरी यात्रा प्रशिक्षु ग्वालों की और से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 308 वें दिवस पर चुनरी यात्रा *श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा ,कामधेनु गो अभयारण्य ,धेनु देवी फाउंडेशन एवं दृष्टिदेवी फाउंडेशन  के तत्वाधान में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें ग्वाल प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रहें पुरुषोत्तम डोंगरे अमरावती, ऋग्वेद भेसे,महादेव तुकाराम काकडे अमरावती ,, प्रफुल वामनराव हाडेकर अमरावती(महाराष्ट्र),भंवर देवराज सिंह सोलंकी इंदौर,निर्मला वाजपेय इन्दौर, विजय मेहरा मध्यप्रदेश,नरवर सिंह आगर मालवा,तुलसी शर्मा बरेली ,विजय पटेल बरेली(यू.पी.),नारायण लाल प्रतापगढ़,कैलाश प्रतापगढ़,रामस्वरूप केवट झालावाड़ ने ग्वाल प्रशिक्षण देने वाले श्री गिरधर सिंह सोडा के नेतृत्व में सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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