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“बैठक में निर्देश और ज़मीनी हकीकत में फर्क – जल जीवन मिशन पर सवाल” 👉 क्या है जल जीवन मिशन की सच्चाई ?” पढ़िए आईटीआई कार्यकर्ता द्वारा बताई पूरी कहानी!”

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क आगर-मालवा। सोमवार को कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह ने समय-सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में सख्त निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन के कार्यों में लापरवाही करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने पीएचई विभाग को सख्त हिदायत दी कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, और यदि किसी भी जगह रोड रेस्टोरेशन का काम अधूरा या खराब हो तो तत्काल सर्वे कर सुधार करवाया जाए।

“बैठक में दिए गए निर्देश – क्या ज़मीनी हकीकत भी बदलेगी?” — बैठक में जल जीवन मिशन के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह ने विद्युत विभाग को वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बिजली कटौती न करने के सख्त निर्देश दिए, ताकि छात्र बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई कर सकें। बोर्ड परीक्षाओं में सुधार के लिए नियुक्त अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्कूलों में जाकर छात्रों को तनाव मुक्त परीक्षा देने के टिप्स दें। कृषि विभाग को खाद विक्रेताओं पर सख्ती बरतने और अमानक खाद बेचने वालों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने का आदेश मिला, वहीं राजस्व विभाग को सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व मामलों का समयसीमा में निपटारा करने की हिदायत दी गई।

👉 अब सवाल ये उठता है कि ये निर्देश ज़मीनी हकीकत में कितने बदलाव लाएंगे? क्या परीक्षाओं के दौरान वाकई में बिजली कटौती बंद होगी, या फिर बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करेंगे? क्या किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद मिलेगी, या फिर मिलावटी उर्वरकों से उनकी फसलें प्रभावित होंगी? और सबसे अहम – क्या ये सभी आदेश अधिकारियों की फाइलों में टिक मार्क लगाने के लिए दिए गए हैं, या जनता को वाकई में इनका लाभ मिलेगा?   सरकारी बैठकों में दिए गए आदेशों और ज़मीनी सच्चाई में जो फासला है, क्या वह इस बार पाटा जाएगा, या फिर यह बैठक भी "किए गए निर्देश" और "लागू नहीं हो पाए" के बीच झूलती रह जाएगी? 
👉 अब जरा दूसरी तरफ देखें, तो RTI कार्यकर्ता रोहित गुप्ता ने बताया कि 
जल जीवन मिशन के तहत पूरे जिले में ही घटिया काम हुआ है। पाइपलाइन की गहराई हो या RCC की मोटाई, सब कुछ मापदंडों की धज्जियां उड़ाकर किया गया। वे बताते हैं कि इस मामले में शिकायतें दी गईं, लेकिन अफसर केवल लीपापोती कर रहे हैं, ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। इतना ही नहीं, योजना अभी भी अधूरी ही नजर आ रही है।
अब सोचने वाली बात ये है कि या तो बैठक में दिए गए आदेश सिर्फ दीवारों तक ही सीमित हैं, या फिर RTI कार्यकर्ता की जानकारी कोरी अफवाह है। पर अगर RTI कार्यकर्ता सही हैं,
तो सवाल उठता है – क्या कलेक्टर महोदय को भी असल हालात की सही जानकारी नहीं दी जा रही? आखिर सच्चाई क्या है?

🔴 क्या ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग सिर्फ कागज़ों पर होगी? क्या अधिकारियों की कार्यवाही सिर्फ फाइलों में दिखेगी? और सबसे अहम – क्या जनता को वाकई में स्वच्छ और सुचारू जल आपूर्ति मिलेगी या फिर यह मिशन सिर्फ “जल” कर रह जाएगा?

अब देखना यह होगा कि कलेक्टर महोदय के निर्देश जमीन पर उतरते हैं या यह बैठक भी सरकारी बैठकों के दस्तावेज़ी इतिहास में एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगी!

वर्जन – पीएचई विभाग आगर के कार्यपालन यंत्री केदार खत्री ने बताया कि आगर जिले में जल जीवन मिशन योजना पूर्ण करने की दिनांक जून 2025 तक बढ़ा दी है अभी तक जिले में 79 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है ।

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