शिक्षा से समाज परिवर्तन कैसे करेगा विद्या भारती का नया विजन?👉वंचित वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने की क्या है विद्या भारती की रणनीति?👉क्या भारतीयकरण के साथ नई शिक्षा नीति होगी कारगर? जानिए इन सवालों के जवाब

विद्या भारती मध्य क्षेत्र कार्यकारिणी बैठक संपन्नराष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गहन मंथन, युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास पर जोर
जनमत जागरण @ रतलाम (अभिषेक जैन)। विद्या भारती द्वारा मध्य क्षेत्र की दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक का आयोजन रतलाम के सरस्वती शिशु मंदिर, काटजू नगर में संपन्न हुआ। इस बैठक में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के क्रियान्वयन एवं शिक्षा में गुणवत्ता लाने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
🔴सनातन संस्कृति आधारित शिक्षा पर बल :: बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि विद्या भारती का उद्देश्य हिंदुत्वनिष्ठ, राष्ट्रभक्त, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक रूप से युवा पीढ़ी का निर्माण करना है। भारतीय समाज में सनातन धर्म, संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने के लिए एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

🔴 वंचित वर्गों तक शिक्षा का प्रसार :: बैठक में समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा के प्रसार पर भी मंथन किया गया। यह निर्णय लिया गया कि समाज को कुरीतियों, शोषण और अन्याय से मुक्त कर समरस, सुसंपन्न और सुसंस्कृत सामाजिक धारा से जोड़ने के लिए शिक्षा को एक सशक्त माध्यम बनाया जाएगा।

🔴 दस कालांशों में गहन चिंतन-मनन :: दो दिवसीय बैठक को दस कालांशों में विभाजित कर शिक्षा, शिक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण और कक्षा-कक्ष में उसके निरूपण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
🔴 वरिष्ठ पदाधिकारियों का मार्गदर्शन:: बैठक में श्रीराम आरावकर (सह संगठन मंत्री, विद्या भारती, अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली), अखिलेश मिश्रा (सह संगठन मंत्री, मध्य क्षेत्र भोपाल), भालचंद्र रावले (संगठन मंत्री), योगेश शर्मा (मालवा), निखलेश महेश्वरी (मध्य भारत), अमित मिश्रा (महाकौशल), डॉ. देवनारायण साहू (छत्तीसगढ़) और अध्यक्ष विवेक शैंडे सहित विभिन्न वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए और कार्यकारिणी सभा का मार्गदर्शन किया।
🔴 वरिष्ठ शिक्षाविदों की विशेष सहभागिता :: बैठक में संजय पटवा (सदस्य, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निर्माण एवं देखरेख समिति), डॉ. रविंद्र सोहिल (सेवानिवृत्त प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय मंदसौर) और डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’ (सेवानिवृत्त प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय, जम्मू-कश्मीर) ने भी विशेष रूप से सहभागिता की।

🔴 शिक्षा-शिक्षण में नवाचारों का समावेश :: बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, विद्या भारती के तत्वावधान में संचालित सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर में शिक्षा-शिक्षण के कार्य को नवाचारों के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।विद्या भारती के इस महत्वपूर्ण आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि वह भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को साकार करने के लिए सतत प्रयासरत है।



