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क्या गौ सेवा से चित्त शुद्धि और मुक्ति संभव है? स्वामीजी का अहम संदेश, जानिए क्या कहा गौ सेवा के फल पर?

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क, सुसनेर। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 311वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने गौ सेवा और चित्त शुद्धि पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “वास्तविक सेवा से चित्त शुद्धि होती है, लेकिन सेवा के फल का भोग करने पर वह शुद्धि समाप्त हो जाती है।”

⏩ सेवा का फल और मुक्ति का मार्ग ::स्वामी गोपालानंद ने स्पष्ट किया कि गौ सेवा करने से इच्छित फल स्वतः ही मिल जाता है, लेकिन उस मिले हुए फल का त्याग करना ही उचित है। उन्होंने बताया कि सेवा, जप, तप, भक्ति, साधना और ध्यान सभी से कुछ न कुछ मिलता है, परंतु उस प्राप्ति का उपयोग न करने पर ही मुक्ति संभव है। उनका कहना था, “सकाम कर्म करो या निष्काम, फल तो मिलेगा ही, क्योंकि प्रकृति का अपना नियम है और कृपा निधान का अपना विधान।”

⏩ पैदल अयोध्या यात्रा पर गए गौभक्तों को दिया भावुक संदेश ::इस अवसर पर बांसवाड़ा से अयोध्या पैदल जा रहे परम गौभक्त कांति लाल जी पंड्या और प्रकाश जी कलाल अभ्यारण्य पहुंचे। स्वामी जी ने उनसे रामजी के चरणों में एक चिट्ठी अर्पित करने का निवेदन किया, जिसमें उन्होंने गौमाता के दुखों के प्रति अपनी व्यथा प्रकट की। उन्होंने कहा, “भगवान, आप गौ हित के लिए पृथ्वी पर आए, लेकिन आज गौमाता दुखी है। या तो उसका सुख लौटा दो या हमें ले जाओ, क्योंकि गौ सेवा को सही ढंग से नहीं कर पाने का दुख असहनीय है।”

⏩ गौ सेवा का संदेश फैलाने का आग्रह ::स्वामी जी ने गौभक्तों से मार्ग में मिलने वाले सभी भक्तों को गौ सेवा के लिए प्रेरित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा में लगे लोगों को फल तो अवश्य मिलेगा, लेकिन उस फल का त्याग ही उन्हें मुक्ति की ओर ले जाएगा।

⏩ क्या गौ सेवा के त्याग से मिलती है मुक्ति? :- स्वामी गोपालानंद सरस्वती के इस अहम संदेश ने गौ सेवा के महत्व और उसके फल के त्याग से मुक्ति की संभावना पर गहन चिंतन का विषय प्रस्तुत किया है।

⏩ विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में महाशिवरात्रि के पुण्य पर्व  22 फरवरी से 27 फरवरी 2025 तक  गो अभयारण्य में गोष्ठाधिपति भगवान गोपालेश्वर महादेव के मंदिर में शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा,श्री राधा कृष्ण विवाह,दो कन्याओं का विवाह,श्री शिव कथा,गो कृपा कथा एवं अग्नि नृत्य जैसे विशाल आयोजन में सम्मिलित होने का पूज्य महाराज ने सभी से आह्वान किया । श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा ,कामधेनु गो अभयारण्य ,धेनु देवी फाउंडेशन एवं दृष्टिदेवी फाउंडेशन  के तत्वाधान में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें ग्वाल प्रशिक्षण शिविर के त्रयोदश दिवस पर प्रशिक्षणार्थियों ने स्वयं  एक एक गोष्ठ की जिम्मेदारी लेकर ग्वालों से विधिवत गौसेवा कार्य करने का प्रशिक्षण लिया ।
⏩ 311 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा एवं राजस्थान के बागड़ से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 311 वें दिवस पर चुनरी यात्रा  मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के खमारपानी ग्राम से शिवदयाल जी ,कैलाश उमरेठी ,चंद्रधर  एवं राजस्थान के बागड़ के बांसवाड़ा से कांति लाल पंड्या, प्रकाश  कलाल ने अपने परिवार की ओर से   सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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