जिला चिकित्सालय – जहर कांड ! आखिर कौन है जिम्मेदार? साइकिल स्टैंड के पूर्व ठेकेदार का आत्मघाती कदम! वीडियो वायरल: क्या सिविल सर्जन की प्रताड़ना बनी वजह? पढ़ें पूरी घटना की यह कहानी

🟨 वीडियो वायरल: ठेकेदार ने सिविल सर्जन पर प्रताड़ना के लगाए गंभीर आरोप, क्या यही बनी आत्मघाती कदम की वजह? 🔴 स्वास्थ्य विभाग या उत्पीड़न का अड्डा?
जनमत जागरण @ आगर-मालवा । जिला चिकित्सालय आगर मालवा में एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार रात में साइकिल स्टैंड के उज्जैन निवासी पूर्व ठेकेदार विपिन चौहान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास करना न केवल एक गंभीर घटना है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं और अधिकारियों के दुर्व्यवहार का भी प्रतीक बन गया है। पीड़ित चौहान का इलाज उज्जैन जिला चिकित्सालय में चल रहा है ।
🟨 सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप :: विपिन चौहान ने जहर खाने से पहले एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिसमें उन्होंने सिविल सर्जन डॉक्टर शशांक सक्सेना पर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में विपिन ने कहा कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन डॉक्टर सक्सेना ने कोई कार्यवाही नहीं की। अंततः उन्हें इस चरम कदम को उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

🟨 जनमत जागरण की पड़ताल: जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता ने जनमत जागरण को जानकारी देते हुए बताया कि “साइकिल स्टैंड के पूर्व ठेकेदार विपिन चौहान ने शुक्रवार रात जहर खा लिया, जानकारी मिली है जिसे गंभीर हालत में उज्जैन जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उज्जैन में उसने बयान दिए हैं कि सिविल सर्जन डॉ. शशांक सक्सेना द्वारा उसे और उसकी पत्नी को प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे मजबूर होकर उसने यह कदम उठाया।”

🟨बायो-मेडिकल वेस्ट विवाद और अब यह मामला! डॉ. शशांक सक्सेना पहले से ही बायो-मेडिकल वेस्ट के अनुचित निस्तारण के मामले में फंसे हुए थे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस लापरवाही को लेकर उन्हें नोटिस भी जारी किया था। ऐसे में अब एक और नया विवाद उनके खिलाफ खड़ा हो गया है, जो यह सवाल उठाता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग में चल क्या रहा है?

🟨 व्यवस्था पर सवाल, जिम्मेदार कौन? आखिर क्यों एक पूर्व ठेकेदार को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि उसे अपनी जान लेने का प्रयास करना पड़ा? क्या यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत विवाद है, या फिर स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की एक और कहानी है?
🔹क्या जिले का स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभा रहा है?
🔹क्या उच्च अधिकारियों द्वारा ऐसी घटनाओं पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी या फिर इसे भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?
🔹पीड़ित के बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- 🟨 यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आखिर कब तक आम आदमी सिस्टम की प्रताड़ना झेलता रहेगा? समय आ गया है जब हमें इन घटनाओं से सबक लेना होगा और भ्रष्टाचार व अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी होगी।



