गौसेवा में छिपा है मोक्ष का मार्ग? 🔹क्या यही है असली क्षत्रिय धर्म? 🔹क्या आप जानते हैं क्षत्रिय की असली डिग्री क्या है? 🔹गौमाता का दूध बेचना पाप या पुण्य? 👉 पढ़िए स्वामी जी का संदेश

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 313वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा, “क्षत्रिय वही है जिसके शरीर पर गौ माता की रक्षा, धर्म सेवा, और बहन-बेटी की सुरक्षा करते हुए लड़ाई के निशान हों। यही उसका असली मैडल और धर्मग्रंथों में वर्णित क्षत्रिय का परिचय है। राणा सांगा के शरीर पर 80 बड़े-बड़े घाव थे, इसीलिए उन्हें महान क्षत्रिय माना गया।” स्वामी जी ने कहा कि जिनके पास बुद्धि, शक्ति और सामर्थ्य है, लेकिन वे गौ माता की रक्षा नहीं करते, तो महाभारत के अनुसार उन्हें नर्क जाना पड़ेगा।
⏩ गौसेवा के तीन उद्देश्य: दर्शन, सेवा और दूध :: स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने कहा, “गौ माता रखने के तीन मुख्य उद्देश्य हैं – दर्शन, सेवा और दूध। गौ माता का दूध कभी बेचें नहीं, बल्कि अतिथियों और बच्चों को पिलाएं। अगर दूध बच जाए, तो उससे दही जमाकर घी बनाएं, जिसका उपयोग पूजा-पाठ और हवन में करें। अगर घी भी बच जाए, तभी उसका विक्रय किया जा सकता है।”
⏩ ग्वाल प्रशिक्षण शिविर में सीखी गौसेवा की विधि :: श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा, कामधेनु गो अभयारण्य, धेनु देवी फाउंडेशन और दृष्टिदेवी फाउंडेशन के तत्वावधान में चल रहे विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में ग्वाल प्रशिक्षण शिविर के पांचवें दिन प्रशिक्षणार्थियों ने स्वयं एक-एक गोष्ठ की जिम्मेदारी लेकर ग्वालों से विधिवत गौसेवा करने का प्रशिक्षण लिया।

⏩ 313 वे दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात एवं मध्यप्रदेश से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 313 वें दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात के डांग जिले चुनर यात्रा सुबेर डांग जिला के सूबेर से लवकेश पाण्डेय, श्याम राजपुरोहित लोकेश सिंह, हरिसिंह ओर रौशन बाड़ी महिला मंडल ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



