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MP: युवक के आत्महत्या प्रयास के विरोध में समाज में आक्रोश, सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की मांग, पढ़िए IG को दिये ज्ञापन में क्या हुई बड़ी बातें

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क आगर मालवा।
क्या एक प्रशासनिक अधिकारी की मनमानी किसी निर्दोष को मौत के कगार पर पहुंचा सकती है?
क्या व्यवस्था के कठघरे में खड़ा इंसान न्याय की आस में दम तोड़ देगा?

आगर मालवा में घटित एक सनसनीखेज घटनाक्रम ने इन सवालों को जन्म दे दिया है।
आरोप है कि जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. शशांक सक्सेना की प्रताड़ना से तंग आकर राजपूत समाज के विपिनसिंह चौहान ने 14 फरवरी को आत्महत्या का प्रयास किया।
इस गंभीर घटना के बाद समाज में उबाल है, और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस महानिरीक्षक (IG) उज्जैन को ज्ञापन सौंपा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष न्याय होगा, या फिर रसूखदारों के दबाव में यह प्रकरण भी धुंध की परतों में खो जाएगा?
🛑 क्या है पूरा मामला?
विपिनसिंह चौहान की पत्नी एकता चौहान को अक्टूबर 2024 में जिला अस्पताल में पार्किंग ठेका दिया गया था, जिसकी निर्धारित राशि भी जमा कराई गई थी। लेकिन, सिविल सर्जन डॉ. शशांक सक्सेना पर आरोप है कि उन्होंने अनुबंध नहीं किया और ठेका किसी अन्य को दे दिया। बार-बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने कोई सुनवाई नहीं की।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि आगर पुलिस, सिविल सर्जन के दबाव में काम कर रही है, और यही वजह है कि आत्महत्या के प्रयास के बावजूद अब तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।
🛑 सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप ::
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी एवं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के उज्जैन संभाग अध्यक्ष महेंद्र सिंह बैस ने बताया कि डॉ. सक्सेना लंबे समय से विपिनसिंह चौहान को प्रताड़ित कर रहे थे। ठेका छीनने के बाद जब उनकी पत्नी एकता चौहान ने न्याय की गुहार लगाई, तो भी प्रशासन ने मामले को अनदेखा कर दिया।
🛑आक्रोशित समाज ने दी चेतावनी ::
इस घटना के बाद समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

🛑 ज्ञापन सौंपने पहुंचे समाज के प्रतिनिधि ::
ज्ञापन सौंपने के दौरान महासभा के युवा विंग सहित विभिन्न क्षत्रिय संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें कृष्ण सिंह परिहार, कृष्ण पाल सिंह ठाकुर, गोपाल सिंह राठौड़, युवराज सिंह ठाकुर, डॉ. जीवन सिंह राजपूत, शुभम सिंह राठौड़, अंकित सिंह राही, गगन सिंह, मानवेंद्र सिंह राजपूत, कैलाश सिंह तंवर, रोहित सिंह राजपूत, रणवीर सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह ठाकुर, मुकेश सिंह बैस, दिलीप सिंह ठाकुर, विश्वेंद्र सिंह बैस, विकास सिंह राजपूत, वैभव सिंह सोलंकी आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
👉अब सवाल यह उठता है कि…
क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी करते रहेंगे?
🛑 क्या पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा?
क्या पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी या रसूखदारों के दबाव में मामले को दबा दिया जाएगा?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है, या फिर यह घटना भी अन्य मामलों की तरह सिर्फ एक फाइल में दबकर रह जाएगी!

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