क्या मातृभाषाओं का संरक्षण ही संस्कृति की आत्मा है? मातृभाषा हमारी पहचान और आत्मीयता का प्रतीक”– कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इंदौर के संभागायुक्त ने क्या कहा – जानिए भारतीय भाषा पर्व की खास उपलब्धियां !

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क @ इन्दोर। इंदौर स्थित माई मंगेशकर हाल में भारतीय भाषा पर्व का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें विविध भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने को मिली। इस अवसर पर विद्या भारती, मालवा प्रांत के संगठन मंत्री योगेश शर्मा ने कहा—
- 🔹“संस्कृति की अभिव्यक्ति है मातृभाषाएं” – योगेश शर्मा ने कहा कि “भाषा अनेक हैं, पर भाव एक है; प्रदेश अनेक हैं, पर देश एक है; संस्कृति और संस्कार एक हैं।” उन्होंने कहा कि ग्राम और वहाँ की संस्कृति देश को जोड़ती है और यही हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक है।
🔹"मातृभाषा हमारी पहचान और आत्मीयता का प्रतीक" – दीपक सिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इंदौर के संभागायुक्त दीपक सिंह ने कहा कि यह आयोजन उनके लिए एक नया अनुभव है। उन्होंने कहा, "भारतीय भाषाएँ हमारी मातृभाषा हैं, जो हमारी पहचान और भावनात्मक संपर्क का माध्यम हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि "भाषाओं का संरक्षण करना हमारी संस्कृति की जड़ों को बचाने जैसा है। हमें इस पर शोध करना चाहिए और अपनी साहित्यिक धरोहर को डिजिटल रूप में संरक्षित कर युवाओं तक पहुँचाना चाहिए।"
🔹“संस्कृति को सहेजने का सतत प्रयास जरूरी” – डॉ. मुकेश मोड़
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक डॉ. मुकेश मोड़ ने की। उन्होंने भारतीय भाषा संवर्धन समिति को इस आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि इंदौर में भी संस्कृति को सहेजने का निरंतर प्रयास हो रहा है।

🔹“18 भाषाओं का भव्य संगम” — विशेष अतिथि डॉ. हेडगेवार समिति के अध्यक्ष ईश्वर हिंदुजा ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और भाषायी समृद्धि का साक्षात उदाहरण है। कार्यक्रम में 18 भाषाओं का प्रतिनिधित्व किया गया, जिनमें साहित्य, सांस्कृतिक वेशभूषा और व्यंजनों की विविधता का प्रदर्शन किया गया।

🔹“युवाओं तक पहुंचनी चाहिए भाषाई धरोहर” – रवींद्र देशपांडे
कार्यक्रम के संयोजक रवींद्र देशपांडे ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाषाओं को केवल बोलने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आधुनिक डिजिटल साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में अभय सिंह राठौड़, अश्विन खरे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रगान के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन हुआ।
🔹"मातृभाषा हमारी पहचान और आत्मीयता का प्रतीक" – दीपक सिंह


