अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश
क्या सनातनी अपनी जड़ों से दूर होकर पाखंड की ओर बढ़ रहे हैं? क्या तथाकथित गोसेवक ही सबसे बड़े दोषी हैं? जानिए स्वामीजी ने क्या कहा ओर क्या किया स्पष्ट

गो अभयारण्य में होने वाला यह भव्य आयोजन क्यों है खास?
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर।
वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 322वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने सेवा के नाम पर बढ़ते पाखंड पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान की उन्नति के बावजूद लोग अंधविश्वास की ओर झुक रहे हैं और गोसेवा से दूर हो रहे हैं। सनातनी समाज की स्थिति उस कबूतर जैसी हो गई है, जो अपनी सुरक्षा के भ्रम में आंखें मूंदे रहता है।
🔹 क्या तथाकथित गोसेवक ही सबसे बड़े दोषी हैं?
स्वामीजी ने स्पष्ट किया कि सच्चे संत, संन्यासी और देवता यदि कोई हैं तो वे केवल गोमाता हैं, लेकिन कुछ लोग गोसेवा के नाम पर दिखावा कर रहे हैं, जो कसाइयों से भी अधिक नुकसानदायक हैं।
🔹 गो अभयारण्य में होने वाला यह भव्य आयोजन क्यों है खास?
विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहे सप्त दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत शिव दरबार की प्राण प्रतिष्ठा एवं 25 फरवरी को गरीब कन्याओं के विवाह समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई गणमान्य उपस्थित रहेंगे।
⏩ 322 वें दिवस पर भागवतवक्ता रामचन्द्र जी जालमपुरा, श्रीमती साधना जी दुबे पत्नी स्वर्गीय महेश चंद्र जी कायमगंज फर्खुदाबाद (उत्तरप्रदेश), मदन लाल जी शर्मा,गायत्री परिवार एवं गौसेवक रटलाई सहित अनेक गौशालाओं के गोभक्त प्रतिनिधि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 322वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 322 वें दिवस पर राजस्थान के जयपुर जिले के उग्रीयावास आसलपुर से मुकेश पुरण , छोटे लाल ,महेश , हंसराज ,पांचुलाल कुमावत, झालावाड़ जिले की रामगंजमंडी के गौसेवकों,मध्यप्रदेश के आगर जिले की बडौद तहसील के जमुनिया (बडोद) से महिला मंडल दशरथ कुवंर,मान कुंवर, प्रेम कुंवर जस्सु कुंवर,वसनबाई के साथ अनेक महिला पुरुष , एवं लोहार दरवाजा सुसनेर व जमुनिया रोड सुसनेर एवं लटूरी ग्राम के समस्त ग्रामवासियों की और से ग्राम की सेकंडों मातृशक्ति एवं युवाओं ने समस्त ग्रामवासियों की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



