“क्या यही है वास्तविक सुख का रहस्य? जानिए गौ आराधना के दिव्य संदेश!”

जनमत जागरण DHARMA@सुसनेर । एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 328वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने बताया कि कुछ पल दुर्लभ होते हैं, जो जीवन को संवारने के लिए मिलते हैं। यदि हम उन पलों को आत्मसात कर लें, तो हमारा मनुष्य जीवन सफल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह मनुष्य शरीर हमें प्राप्त हुआ है, लेकिन जो कुछ हमें मिलता है, उसे अपना नहीं माना जाता। यह केवल एक अवसर है, जिसका सदुपयोग करना हमारा कर्तव्य है। यह शरीर स्थायी नहीं है, लेकिन हमारी आत्मा सदा से है और सदा रहेगी। इसलिए, इस जीवन का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
🟠 जीवन में बदलाव के छोटे-छोटे कदम::
🔹सुबह की सैर (Morning Walk) को मंदिर जाने में बदलें।
🔹जॉगिंग के स्थान पर गौशाला जाकर गौसेवा करें।🔹जिम में पसीना बहाने की बजाय गौशाला में गोबर उठाएं, चारे की गांठ उठाएं।
🔹पार्टियों में समय व्यर्थ करने के बजाय सत्संग में लगाएं।
🔹तथाकथित खुशियों पर खर्च करने के बजाय धन को सेवा में लगाएं।
स्वामी जी ने बताया कि संपत्ति, शरीर, सामर्थ्य और संतति हमें केवल सेवा के लिए ही प्राप्त हुए हैं। जब हम इन्हें सेवा में लगाते हैं, तभी हमें वास्तविक सुख प्राप्त होता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चार प्रकार की सब्जियां, तीन मिठाइयां, दो-तीन प्रकार की पूड़ियां, अचार, नमकीन और पापड़ खाने से उतनी प्रसन्नता नहीं मिलेगी, जितनी दो सुखी रोटी किसी भूखे को खिलाने से मिलती है।
⏩ गौमाता: जीवन में बदलाव का दिव्य आधार :: स्वामी जी ने बताया कि कलियुग में गौमाता ही एकमात्र दिव्य आश्रय और महान सहारा हैं। उनके प्रभाव से हमारा स्वभाव बदल सकता है, और विनाशकारी विचार सकारात्मक सृजन में परिवर्तित हो सकते हैं।

⏩ 328 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं बिहार से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 328 वें दिवस पर चुनरी यात्रा श्री कामधेनु गो अभ्यारणय मालवा मध्यप्रदेश के सभी ग्वाल ग्वालिनो ,राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमंडी से :: पोरवाल मेटल्स से भगवंती जी, रेखा जी, अलका जी, संगीता जी, निधि जी, शाबी जी,रायपुर की महिला मंडल,छत्तीसगढ़ के रायपुर एवं बिहार के पटना से सैनिक परिवार ने सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



