इनोवेशन एण्ड यूआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

“गोसंरक्षण से राष्ट्रसंरक्षण – मा. सुरेश जी सोनी का प्रेरक संदेश!” क्या आपने देखा? विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में 1008 आंवला वृक्षों का अनूठा उपवन!

क्या आपने देखा? विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में 1008 आंवला वृक्षों का अनूठा उपवन!

जनमत जागरण @ सुसनेर | 10 मार्च – मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य “श्री कामधेनु गो अभयारण्य सालरिया (आगर मालवा)” में 1008 आंवला वृक्षों का उपवन विकसित करने की अनूठी पहल की गई। इसका शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मा. सुरेश जी सोनी के करकमलों से हुआ।

गो अभयारण्य में वृक्षारोपण और गो आराधना का संगम

यह आयोजन गोवंश रक्षा वर्ष के तहत मनाए जा रहे एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 335वें दिवस पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. उमेश जी शर्मा (अध्यक्ष, भारतीय पशुचिकित्सा परिषद, नई दिल्ली), श्री मोहन जी नागर (अध्यक्ष, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद), डॉ. पी. एस. पटेल (संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्यप्रदेश), डॉ. प्रवीण जी सिंदे (उपसंचालक, मध्यप्रदेश गो संवर्धन केन्द्र), श्री रमेश चंद पंवार (उपसंचालक, पशुपालन विभाग) और डॉ. उमेश जैन (अतिरिक्त उपसंचालक, पशुपालन विभाग, आगर मालवा) सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

गो अभयारण्य में नवाचार और पर्यावरण संरक्षण

आयोजन के दौरान अतिथियों ने गो अभयारण्य की लघु परिक्रमा कर सवा छह हजार गोमाता एवं नंदी भगवान के दर्शन किए। इसके अलावा, चार बायोगैस संयंत्र, प्रोम एवं वर्मिकंपोस्ट खाद निर्माण का निरीक्षण भी किया गया।

सजीवन लाइफ की अनूठी पहल

“सजीवन लाइफ” संस्था की नीतूबेन पटेल (गुजरात) के मार्गदर्शन में यह उपवन विकसित किया जा रहा है। गो अभयारण्य को हरा-भरा बनाने के लिए छायादार और फलदार वृक्षों का रोपण किया जाएगा। साथ ही, विभिन्न प्रजातियों के हरे चारे की भी व्यवस्था की जाएगी।

आध्यात्मिक अनुष्ठान और आशीर्वाद

अंत में अतिथियों ने भगवान मीरा माधव, भगवती करणी माता और कल्पगुरु भगवान दत्तात्रेय के दर्शन कर पूज्य गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामीजी ने सभी को उपरना ओढ़ाकर और भगवती गोमाता की छवि देकर सम्मानित किया।

गो अभयारण्य के लिए एक नई दिशा!

“कामधेनु गो अभयारण्य के प्रबंधक शिवराज शर्मा” ने बताया कि यह पहल गो संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में और भी वृक्षारोपण और हरित परियोजनाओं को गति दी जाएगी।

क्या यह पहल गोवंश संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के लिए एक नया आदर्श बनेगी? अपनी राय कमेंट में दें!

Related Articles

error: Content is protected !!