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क्या सेवा और सुमिरन ही परमात्मा को पाने का मार्ग? जानिए स्वामी गोपालानंद सरस्वती के विचार

जनमत जागरण @सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहे एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 336वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने कहा कि “परमात्मा को पाने का एक ही साधन है – सेवा और सुमिरन।”

स्वामीजी का संदेश: सेवा और सुमिरन से ही जीवन सार्थक

स्वामीजी ने अपने प्रवचन में बताया कि व्यक्ति को पाखंडों में नहीं पड़ना चाहिए। महिलाओं को व्यर्थ की बातों में उलझने के बजाय समाजसेवा की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले का उदाहरण देते हुए कहा कि 178 वर्ष पूर्व उन्होंने जो क्रांतिकारी कदम उठाया, उसे आज भी याद किया जाता है। इसी तरह अहिल्याबाई, जीजाबाई, जयवंता बाई जैसी वीरांगनाओं का जीवन भी सेवा और सुमिरन से ओत-प्रोत था।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की माता जयवन्ता बाई ने अपने पुत्र को राष्ट्र रक्षा के योग्य बनाकर स्वयं वृंदावन में भक्ति का मार्ग चुन लिया ताकि उनकी ममता प्रताप के कर्तव्य में बाधा न बने।

क्या हिन्दू राष्ट्र के सपने के लिए सेवा आवश्यक?

स्वामीजी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक गौशालाओं में कर्मचारी काम करते रहेंगे और लोग स्वयं गौसेवा नहीं करेंगे, तब तक हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने आज की पीढ़ी को सेवा और सुमिरन का महत्व न समझ पाने को दुर्भाग्य बताया।

मुख्यमंत्री से महत्वपूर्ण बैठक, उपसंहार उत्सव की तैयारियाँ तेज

मध्यप्रदेश शासन द्वारा घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत 30 मार्च से 12 अप्रैल 2025 तक आयोजित होने वाले उपसंहार उत्सव की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से राज्य मंत्री लखन पटेल एवं कामधेनु गो अभयारण्य के प्रबंधक शिवराज शर्मा ने भोपाल एयरपोर्ट पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने जल्द कार्यक्रम की तिथि तय करने का आश्वासन दिया।

चुनरी यात्रा: मध्यप्रदेश से आया विशेष भक्ति समूह

गोकृपा कथा के 336वें दिवस पर मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा एवं शत्रुखेड़ी के गोभक्तों ने भगवती गोमाता के लिए चुनरी अर्पित की। भक्तों ने गाजे-बाजे के साथ गोमाता का पूजन किया और स्वामी गोपालानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। अंत में सभी ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर गोसेवा की एवं गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

क्या सेवा और सुमिरन का मार्ग अपनाए बिना जीवन सार्थक हो सकता है?
क्या हिन्दू राष्ट्र की कल्पना बिना गौसेवा के पूरी हो सकती है?
गोवंश रक्षा वर्ष में सरकार की यह पहल कितनी प्रभावी होगी?

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