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“मेडिकल चमत्कार: (Medical Miracle) , झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ सर्जरी से मरीज का हाथ बचाया गया” – पैर की नस से बचाया हाथ, जानिए कैसे?”

▪️ झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा का करिश्मा! पैर की नस से बचाया हाथ, जानिए कैसे?

जनमत जागरण @ झालावाड़। क्या कभी आपने सोचा है कि शरीर के एक हिस्से की नस को निकालकर दूसरे हिस्से में लगाकर खोई हुई कार्यक्षमता को वापस लाया जा सकता है?

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के SRG हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एक ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया! न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए डॉ. रामसेवक योगी ने एक दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसमें मरीज के पैर की नस को उसके हाथ में ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे उसका बेकार हो चुका हाथ फिर से काम करने लगा। यह चिकित्सा विज्ञान का एक अनोखा चमत्कार है, जो कई मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। यहां के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम देते हुए एक मरीज को अपंग होने से बचा लिया।

पीपलहेड़ा गांव, छिपाबड़ोद निवासी 34 वर्षीय बलराम के हाथ की नस (Ulnar Nerve) एक सड़क दुर्घटना के बाद खराब हो गई थी, जिससे उसका हाथ धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहा था। जब उसने SRG हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी से परामर्श लिया, तो जांच में पता चला कि बिना ऑपरेशन के उसका हाथ हमेशा के लिए बेकार हो सकता है।

परिजनों की सहमति के बाद, डॉक्टरों ने बलराम के पैर की नस (Sural Nerve) को हाथ की खराब नस के स्थान पर ट्रांसफर कर दिया। यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही और अब बलराम का हाथ दोबारा काम करने लगा है।

डॉ. रामसेवक योगी ने बताया कि यदि हाथ या पैर की नस क्षतिग्रस्त हो जाए, तो 6 महीने के भीतर सर्जरी करना अनिवार्य होता है। अधिक देर होने पर ऑपरेशन भी सफल नहीं हो पाता। इस तरह की जटिल सर्जरी देश के कुछ ही अस्पतालों में की जाती है और इसकी लागत भी बहुत अधिक होती है। लेकिन SRG हॉस्पिटल में यह आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त में उपलब्ध है।

👉 डॉ. रामसेवक योगी ने रचा इतिहास! पहले भी कर चुके हैं जटिल ऑपरेशनों को अंजाम

आपको बता दें कि , पूर्व में भी झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ. रामसेवक योगी और उनकी टीम ने पहले भी कई जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इससे पहले भी स्पाइन सर्जरी, ब्रेन ट्यूमर रिमूवल और परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) की सर्जरी में उन्होंने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। हाल ही में एक मरीज के सिर के अंदर जमे खून के थक्के (Brain Hematoma) को सफलतापूर्वक हटाया गया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। इसके अलावा, स्पाइनल कॉर्ड में गंभीर चोट के कारण पैरालिसिस का शिकार हुए एक मरीज की जटिल सर्जरी कर उसे दोबारा चलने में सक्षम बनाया गया। तंत्रिका तंत्र से जुड़ी ऐसी दुर्लभ सर्जरी केवल कुछ गिने-चुने अस्पतालों में ही होती हैं, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और कुशल टीम के कारण अब ये सफल ऑपरेशन हो रहे हैं, जो चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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