▶️ ट्रैफिक मैनेजमेंट : गुर्जर खेड़ी का भूतिया बोर्ड: नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ‘दिशा भ्रम’ योजना! – समझिए, कैसे एक गलत बोर्ड मुसाफिरों को भटका रहा है?

▶️ प्रशासनिक लापरवाही | क्या मामला है? जब गुर्जरखेड़ी जाने वाले आकली पहुंच रहे हैं!
जनमत जागरण सुसनेर: अगर आप गुर्जर खेड़ी गांव जाने का मन बना रहे हैं, तो पहले अपने भीतर की आध्यात्मिक शक्ति को जागृत कर लें, क्योंकि आपके धैर्य और विवेक की परीक्षा होने वाली है! नेशनल हाईवे 552 जी पर नवोदय विद्यालय के पास लगा ‘गुर्जर खेड़ी’ का बोर्ड एक ऐसी ‘भूलभुलैया’ की ओर इशारा करता है, जहां से सही रास्ता खोजने में अच्छे-अच्छों की बुद्धि चकरा जाए।
👁️🗨️ बोर्ड देखिए, भटकिए, और आकली पहुंच जाइए!
अब तक हाईवे अथॉरिटी ने तकनीकी खामियां छोड़कर ही यात्रियों की परीक्षा ली थी, लेकिन अब उन्होंने बोर्ड लगाकर भी जनता को ‘गोल गोल घुमाने’ की ठान ली है। हुआ यूं कि सुसनेर से 4 किलोमीटर पहले नवोदय विद्यालय के पास ‘गुर्जर खेड़ी’ का संकेत बोर्ड लगा दिया गया। बस, इसके बाद यात्री बेचारे अपना मोबाइल, गूगल मैप और लोकल गाइड सब कुछ आजमाकर भी सही रास्ता नहीं खोज पा रहे।
असल में, जिसे ‘गुर्जर खेड़ी’ बताकर बोर्ड ठोक दिया गया है, वो गांव असल में आकली है! अब जो भी मासूम इस बोर्ड के सहारे अपने सफर की दिशा तय करता है, वह गुर्जर खेड़ी पहुंचने की बजाय आकली के खेतों में घूमता नजर आता है।

➡️ नेशनल हाईवे अथॉरिटी की नई ट्रिक – ‘भ्रम में रहो, भ्रमण करो!’
अब बड़ा सवाल यह है कि ये गलती किसकी है? क्या ठेकेदार ने ‘मानचित्र विशेषज्ञ’ बनने का प्रयास किया, या फिर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने ‘गूगल मैप चैलेंज’ लांच कर दिया है, जहां हर यात्री को सही गांव तक पहुंचने के लिए खुद ही दिमाग लगाना पड़ेगा?
इस हाईवे की प्लानिंग देखकर ऐसा लगता है कि ठेकेदार महोदय ने सड़क बनाते समय पानी पी-पीकर इंजीनियरिंग की डिग्री को कोसा होगा और फिर खुद ही गांवों के नाम तय कर दिए! दूसरी ओर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अफसरों ने भी अपनी पुरानी परंपरा निभाई – ‘सब चलता है’ वाले अंदाज में साइनबोर्ड को देखकर आंखें मूंद लीं।
👁️🗨️ ‘गुर्जर खेड़ी’ के नाम पर ‘आकली’ पहुंचने का सिलसिला जारी!
अब सवाल यह उठता है कि इस गलती को सुधारने के लिए कौन जिम्मेदार है?
- ठेकेदार, जिसने शायद नक्शे की बजाय ज्योतिष शास्त्र देखकर बोर्ड लगाया।
- नेशनल हाईवे अथॉरिटी, जिसे शायद अभी तक इसका एहसास ही नहीं हुआ कि लोग गलत दिशा में जा रहे हैं।
- वो भोले-भाले मुसाफिर, जो गुर्जर खेड़ी की तलाश में आकली पहुंचकर सोच रहे हैं, “गांव छोटा हो गया या रास्ता बड़ा?”
👉 अब क्या होगा?
सरकारी सिस्टम की कार्यशैली को देखते हुए हम इतना जरूर कह सकते हैं कि –
- अगर कोई स्थानीय नेता फोटो खिंचवाने पहुंच गया, तो बोर्ड जल्द बदल जाएगा।
- अगर कोई अधिकारी वहां से गुजरा, तो वह सोचेगा – “गलती किसकी भी हो, ठीक करवाने की जरूरत क्या है?”
- और अगर यात्री यूं ही परेशान होते रहे, तो जल्द ही कोई इसे ‘टूरिस्ट स्पॉट’ घोषित कर देगा!
😂 तो अगली बार जब भी आप गुर्जर खेड़ी जाने का इरादा करें, तो पहले एक ‘जीपीएस विशेषज्ञ’ से सलाह लें, गूगल मैप को दो बार क्रॉस-चेक करें और मन में यह धारणा बना लें कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी का असली उद्देश्य यात्रियों को उनकी मंजिल से दूर भेजना ही है। वरना आप भी आकली में खड़े होकर यही सोचते रह जाएंगे – “गुर्जर खेड़ी गई कहां?”



