अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

गोरक्षकों पर लाठीचार्ज, लेकिन कसाई बेखौफ क्यों? क्या सरकारें गोरक्षा को लेकर गंभीर हैं? भोपाल में गोरक्षा के नाम पर हुआ षड्यंत्र: कौन है जिम्मेदार?

क्या गो रक्षा और राष्ट्र सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं?

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत, जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ग्राम पंचायतों ननोरा, श्यामपुरा, सेमली और सालरिया की सीमा पर स्थित श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

इस आयोजन के 339वें दिवस पर संत विचारक स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने गौ सेवा और राष्ट्र सेवा को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि जिस देश में गाय सुरक्षित नहीं, वह देश भी सुरक्षित नहीं रह सकता।

क्या होली का अर्थ केवल उत्सव मनाना है?

स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आसुरी शक्तियों के विनाश और दैवीय शक्तियों के पुनरुत्थान का प्रतीक है। लेकिन वर्तमान समय में आसुरी प्रवृत्तियाँ हावी हैं और गोरक्षा के नाम पर राजनीति की जा रही है

उन्होंने कहा कि आज गौभक्तों, गौसेवकों और गौप्रेमियों को मूर्ख बनाया जा रहा है। मंचों पर बड़े-बड़े नेता गाय माता की महत्ता पर लंबी-चौड़ी बातें करते हैं, लेकिन वास्तव में गौसेवा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

गोरक्षा के नाम पर छलावा या साजिश?

स्वामी जी ने भोपाल में घटी एक चौंकाने वाली घटना का जिक्र किया, जिसमें एक तिलकधारी व्यक्ति टोपी पहनकर मरी हुई गाय का मांस लेकर धरने पर बैठ गया। पुलिस जांच में पता चला कि यह सब एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र था। एक व्यक्ति ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए एक अन्य व्यक्ति को 50,000 रुपये देकर यह नाटक रचवाया।

इसी तरह, महाराष्ट्र के जलगांव जिले की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गोवंश से भरे ट्रक की शिकायत करने पर पुलिस ने कसाई के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय गोरक्षकों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

क्या गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध जरूरी है?

गोपाल परिवार संघ द्वारा गठित 12 फाउंडेशन में से “धेनु शक्ति संघ” की प्रमुख श्यामा गोपाल ने कहा कि पूज्य महाराज जी ने इन संस्थाओं का गठन अपनी पद-प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि भारत की 9 करोड़ गोमाताओं के संरक्षण के लिए किया है।

उन्होंने मातृशक्ति को गौसेवा और गोरक्षा आंदोलन में आगे आने का आह्वान किया और कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो दिल्ली कूच करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

12 मार्च से पोस्ट कार्ड अभियान शुरू

स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गोमाता को सर्वोच्च स्थान दिलाने के लिए 12 मार्च से पोस्ट कार्ड अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस अभियान के तहत, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गोहत्या पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।

क्या गोरक्षा के लिए आंदोलन तेज होगा?

स्वामी जी ने कहा कि यदि सरकारें गोरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हुईं, तो गोभक्तों को स्वयं आगे आकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ना होगा। उन्होंने भारत के सभी सनातन धर्मावलंबियों से आह्वान किया कि “जब तक गोमाता को सर्वोच्च स्थान नहीं मिल जाता और सड़कों पर एक भी गाय भूखी नहीं दिखती, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

होलिका दहन और चुनरी यात्रा की खास तैयारियां

विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में 14 मार्च को केशव टेकरी पर होलिका दहन और 15 मार्च को प्राकृतिक रंग-गुलाल के साथ होलिका महामहोत्सव मनाया जाएगा।

वहीं, 339वें दिवस पर राजस्थान के रायपुर से चुनरी यात्रा निकली, जिसमें रामप्रसाद राठौर, रमेश शर्मा, सुंदरलाल शर्मा एवं उनके परिवार की मातृशक्ति ने भाग लिया। सभी ने भगवती गोमाता को चुनरी अर्पित कर गोपूजन और यज्ञशाला की परिक्रमा की

गोरक्षा आंदोलन में कौन-कौन से बड़े नाम जुड़े?

महामहोत्सव के 338वें दिवस पर रोशन सिंह सिसोदिया (सेमलखेड़ी), श्याम सिंह सिसोदिया (जसमियां, देवास), मनोहर सिंह पवार (इंदौर) और राज्यवर्धन सिंह (चिरडी, उज्जैन) सहित कई प्रमुख अतिथि उपस्थित रहे।

गोरक्षा का भविष्य: संघर्ष या समाधान?

गोरक्षा को लेकर तमाम आंदोलन और संकल्प लिए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कानून बनाएंगी? क्या गौसेवा केवल भाषणों और मंचों तक सीमित रहेगी, या फिर वास्तव में गौमाता को सर्वोच्च स्थान मिलेगा?

तो क्या भारत में गोरक्षा का भविष्य सुरक्षित है? या इसे केवल राजनीति के मंच पर ही प्रयोग किया जा रहा है?

Related Articles

error: Content is protected !!