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होली विशेष : “होली केवल उत्सव या रंग नहीं , सत्य की जीत और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक

✍ संपादकीय कलम से: आध्यात्मिक चेतना और वर्तमान संदर्भ में होली ✍

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सत्य की विजय, सामाजिक समरसता और आत्मशुद्धि का पर्व है। प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के दहन की कथा हमें यह सिखाती है कि असत्य और अहंकार कितने भी प्रबल क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही जीत होती है। लेकिन आज इस त्योहार को विभिन्न षड्यंत्रों के माध्यम से नकारात्मक रूप देने की कोशिश हो रही है। कभी इसे जल संरक्षण से जोड़कर बदनाम किया जाता है, तो कभी इसे “सेकुलर” बनाने की रणनीति अपनाई जाती है। क्या यह केवल संयोग है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा?

त्योहारों पर विशेष नैरेटिव क्यों गढ़े जाते हैं?

हर साल होली से पहले सोशल मीडिया पर अचानक जल संकट को लेकर बहस तेज हो जाती है। लोगों से “सूखी होली” मनाने की अपील की जाती है, लेकिन उसी वर्ष अन्य अवसरों पर पानी की बर्बादी पर कोई चर्चा नहीं होती।

यह सोचने की जरूरत है कि जल संरक्षण केवल होली के समय ही क्यों याद आता है?

त्योहारों को सेक्युलर बनाने की साजिश

हिंदू त्योहारों को उनकी आध्यात्मिक जड़ों से अलग करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।

  • “सेक्युलर होली” के नाम पर इसे केवल रंगों और मौज-मस्ती तक सीमित करने की कोशिश होती है, जबकि यह आध्यात्मिक चेतना और सत्य की विजय का संदेश देता है।
  • “ग्रीन दीवाली” के नाम पर इसे प्रदूषण से जोड़कर बदनाम किया जाता है, जबकि अन्य अवसरों पर आतिशबाजी और ध्वनि प्रदूषण को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई जाती।
  • क्या यह योजनाबद्ध रूप से सनातन परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास नहीं है?

सोशल मीडिया और षड्यंत्रकारी नैरेटिव

आज सोशल मीडिया ऐसा हथियार बन चुका है, जहाँ किसी भी त्योहार को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने के लिए योजनाबद्ध अभियान चलाए जाते हैं।

  • त्योहारों के समय सोशल मीडिया पर “बायकॉट होली” जैसे ट्रेंड क्यों देखने को मिलते हैं?
  • क्या यह हिंदू संस्कृति के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता का संकेत नहीं देता?
  • हमें इन षड्यंत्रों को समझकर इनके प्रति सजग रहने की जरूरत है।

हमारी जिम्मेदारी

  • अपने त्योहारों को लेकर गर्व महसूस करें और सही जानकारी दूसरों तक पहुँचाएँ।
  • जल संरक्षण और पर्यावरण की चिंता सिर्फ त्योहारों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाएँ
  • सोशल मीडिया पर आने वाली नकारात्मक खबरों को बिना जाँचे-परखे आगे न बढ़ाएँ
  • सत्य के पक्ष में खड़े हों और संस्कृति विरोधी षड्यंत्रों को तर्कसंगत तरीके से जवाब दें।

संदेश

होली आत्मशुद्धि, प्रेम और समरसता का पर्व है। यह हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को अंततः विजय प्राप्त होती है। हमें अपनी परंपराओं पर गर्व करना चाहिए और किसी भी नकारात्मक अभियान का शिकार बनने से बचना चाहिए। इस होली, केवल चेहरे ही नहीं, सोच को भी रंगों से सराबोर करें और अपनी संस्कृति का सम्मान करें।

जनमत जागरण परिवार की ओर से आप सभी को प्रेम, उल्लास और आध्यात्मिक प्रकाश से भरी होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

– राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
संपादक, जनमत जागरण न्यूज पोर्टल

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