“क्या गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान मिलेगा या फिर रह जाएगी सिर्फ चर्चा तक? – स्वामी जी का संदेश”

क्या भारत में गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलेगा?
दिल्ली में संतों का महा आंदोलन, प्रशासन ने दी थी अनुमति फिर क्यों रोका?
जनमत जागरण @ सुसनेर। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 341वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित संतों के महा संवाद को अचानक निरस्त किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और प्रशासन ने पहले गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गोहत्या बंदी पर चर्चा के लिए अनुमति दी थी, लेकिन दो दिन पूर्व इसे निरस्त कर दिया गया, जो देश के गोभक्तों के लिए क्षोभ का विषय है।
स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने कहा, “जिस देश में गौमाता को मां का दर्जा प्राप्त है, जहां पंचगव्य का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है, वहां आज भी गाय को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल रही। गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए संतजन दिल्ली आकर सरकार से संवाद करना चाहते थे, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।”
गौसेवा के लिए 12 फाउंडेशन गठित, धेनु शक्ति संघ की अहम भूमिका
गोपाल परिवार संघ की बहन राधा गोपाल ने बताया कि गुरुदेव द्वारा नवगठित 12 फाउंडेशन गौमाता को आश्रय, आहार, औषधि, आज़ादी, आनंद एवं आलिंगन दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं। इन संगठनों का मुख्य उद्देश्य भारत में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और समाज में गौसेवा की भावना जागृत करना है।
राधा गोपाल ने कहा, “देश की आधी आबादी मातृशक्ति की है और इतिहास गवाह है कि जहां मातृशक्ति आगे नहीं आई, वहां आंदोलन विफल हुए। गोरक्षा आंदोलनों को भी तभी सफलता मिलेगी जब भारत की मातृशक्ति इसमें सक्रिय भूमिका निभाएगी।”
गोभक्तों ने खेली पंचगव्य के साथ होली

विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में 15 मार्च को कथा के उपरांत सभी गोभक्तों ने प्राकृतिक रंग, गुलाल और पंचगव्य के साथ होली खेली। इस अवसर पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात से बड़ी संख्या में गौभक्त पहुंचे।
चुनरी यात्रा: गौमाता के सम्मान में समर्पित
341वें दिवस पर चुनरी यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश से श्रद्धालु भगवती गौमाता के लिए चुनरी अर्पित करने पहुंचे। कथा मंच पर विराजित गौमाता को चुनरी ओढ़ाई गई और गोसेवा के संकल्प लिए गए। अंत में सभी ने गौ पूजन, यज्ञशाला की परिक्रमा और महाप्रसाद ग्रहण किया।



