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सुसनेर में हुआ ऐसा ऐलान, जिसे सुनकर हर कोई रह गया हैरान! जानिए, क्या हुआ ऐलान?

जनमत जागरण @ सुसनेर। बुधवार को होने वाली रंगपंचमी के अवसर पर आयोजित मूर्ख सम्मेलन इस बार पहले से ही चर्चा में आ गया है। हर साल की तरह इस बार भी सुसनेर के लोग रंग-गुलाल खेलने के साथ-साथ इस अनूठी परंपरा को निभाने वाले हैं, लेकिन इस साल मंच से ऐसा ऐलान हुआ कि हर कोई चौंक गया!

मूर्खता का महाकुंभ!
रंग खेलना तो हर जगह होता है, लेकिन सुसनेर में मूर्खों की पहचान भी उड़ती है। हर साल मंच से बड़े-बड़े नामों को मूर्ख उपाधि से नवाजा जाता है, लेकिन इस बार मंच संचालक ने ऐलान किया,

फाइल फोटो – सुसनेर में रंग पंचमी पर आयोजित मुर्ख सम्मेल

“इस बार महामूर्ख का खिताब हम नहीं देंगे, बल्कि आप सब खुद तय करें कि सबसे बड़ा मूर्ख कौन है!”

आठ दशक पुरानी परंपरा—मूर्खता का ISO सर्टिफिकेट!
यह परंपरा आठ दशक पुरानी है, जिसे लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मीनारायण शुक्ला और श्रीराम भवसार ने शुरू किया था। फिर महेश भावसार ने 2000 में इसे दोबारा शुरू किया। तब से यह कार्यक्रम हर साल रंगपंचमी के दिन आयोजित किया जाता है।

मंच पर व्यंग्य, जनता में ठहाके!
इस सम्मेलन में नेताओं, अफसरों और प्रतिष्ठित नागरिकों की कारस्तानियों पर व्यंग्य कसे जाते हैं, और मजेदार बात यह है कि कोई भी बुरा नहीं मानता। इस बार जब मंच से ऐलान हुआ कि जनता खुद तय करेगी कि सबसे बड़ा मूर्ख कौन है, तो कुछ लोग चौंके, कुछ मुस्कुराए, और फिर पूरा माहौल ठहाकों से गूंज उठा।

हंसी के साथ संगीत का भी तड़का!
इस साल का मूर्ख सम्मेलन बुधवार को रंगपंचमी के दिन पंडित दीनदयाल चौक पर होगा। कार्यक्रम में फागुनी गीतों और भजनों का भी मजेदार तड़का लगेगा। इसमें सुनील बांगड़, लोकेंद्र सिंह तोमर, अरुण भाटी और ललित सांवला एंड टीम अपनी प्रस्तुति देंगे।

अवधारणाएं बदलने का मौका!
सुसनेर का यह कार्यक्रम एक खास संदेश देता है—“समझदारी और सावधानी से अपने निर्णय लें!” तो अगर आपको लगता है कि आप बहुत समझदार हैं, तो इस सम्मेलन में जरूर आइए, क्योंकि यहां हर कोई अपनी हंसी पर काबू नहीं रख सकता!

तो, बुरा ना मानो, मूर्ख सम्मेलन है!

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