“एक ही दिन में नोटबंदी, GST और धारा 370 हट सकती है, तो गोहत्या पर प्रतिबंध क्यों नहीं? | स्वामीजी का बड़ा सवाल!”

क्या गोसेवा से बारिश और समृद्धि संभव है?
सुसनेर @ जनमत जागरण। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 348वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भारत में गोवंश संरक्षण को लेकर गंभीर चिंतन आवश्यक है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में गोवध जारी है, लेकिन संतोष की बात यह है कि गोभक्त इसके विरुद्ध परिश्रम कर रहे हैं।
स्वामीजी ने कहा कि जिस देश में रातोंरात 2000 के नोट बंद हो सकते हैं, जहां करोड़ों लोग एक साथ मोबाइल की लाइट जला सकते हैं, जहां एक ही दिन में GST और धारा 370 जैसे निर्णय लागू हो सकते हैं—तो फिर गोहत्या पर एक दिन में प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा सकता? यह देश के सामने एक बड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 80 साल बाद भी अगर यह नहीं हुआ, तो अब और कितनी देर चुप बैठेंगे?
👉 स्वामीजी ने ऐसा क्यों कहा?
स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज का मानना है कि जब भारत सरकार नोटबंदी, GST, और धारा 370 जैसे बड़े फैसले रातों-रात लागू कर सकती है, तो गोहत्या पर प्रतिबंध भी एक दिन में लगाया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब करोड़ों लोग मोबाइल की लाइट जला सकते हैं, थाली बजा सकते हैं, तो वे गोसंरक्षण के लिए भी एकजुट हो सकते हैं। उनकी चिंता यह है कि स्वतंत्रता के 80 साल बाद भी भारत में गोहत्या जारी है। अगर अब नहीं रुकी, तो कब रुकेगी?
👉 वे यह चाहते हैं:
स्वामीजी का संदेश स्पष्ट है—भारत के सनातनियों को संगठित होकर ‘ग्वाल शक्ति सेना’ और ‘धेनु शक्ति संघ’ के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाना होगा ताकि गोहत्या पर स्थायी प्रतिबंध लगे। उनके अनुसार, अगर पूरा देश एकमत हो जाए, तो यह कानून भी एक दिन में लागू किया जा सकता है।
क्या गोवंश संरक्षण से जल संकट टल सकता है?
स्वामीजी ने कहा कि जिस देश में जलदान का विधान है, वहां आज 15 से 20 रुपये लीटर पानी बिक रहा है। इसका मुख्य कारण गोमाता की घटती संख्या है। उन्होंने दावा किया कि जहां गोसेवा बढ़ती है, वहां वर्षा भी अधिक होती है। पहले हर भारतीय के पास औसतन 10 गायें होती थीं, लेकिन अब 10 भारतीयों पर एक भी गाय नहीं बची। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का जन्मदिन गो अभयारण्य में क्यों मनाया जाएगा?

मध्यप्रदेश शासन द्वारा मनाए जा रहे ‘गोवंश रक्षा वर्ष’ के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपना 61वां जन्मदिवस 25 मार्च, पापमोचनी एकादशी के दिन, विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में मनाएंगे। इसकी तैयारियों का जायजा लेने के लिए आगर मालवा कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने अभयारण्य का दौरा किया। दौरे के दौरान सभी अधिकारियों ने भगवती गोमाता की कथा का श्रवण किया और गोसेवा का संकल्प लिया।
चुनरी यात्रा में देशभर से उमड़े गोभक्त
गोकृपा कथा के 348वें दिवस पर महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से आए गोभक्तों ने चुनरी यात्रा निकाली। वीना मिश्रा, नीलेश मिश्रा, श्वेता (मुंबई), संतोष कानूनगो, गोपाल, सावित्री गुप्ता (दिल्ली), जगदीश पारेता, कृष्ण मुरारी पारेता (जावर), देवकी नंदन पुजारी, सीताराम पुजारी (सालासर बालाजी) आदि ने भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाकर पूजन किया।
क्या गोसेवा से बारिश और समृद्धि संभव है?
स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मारवाड़ में जब गोसेवा बढ़ी तो वहां गंगनहर और मां नर्मदा का जल पहुंचा। वहीं, मालवा में गोसेवा घटने से वर्षा कम होती गई। क्या गोसेवा से विश्वयुद्ध टल सकता है? क्या जल संकट का समाधान गोवंश संरक्षण में छिपा है?
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