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“शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ का बड़ा संदेश: बुरी बातें हृदय में न उतारें, जानिए इसका गूढ़ अर्थ”

“भगवान शंकर ने हलाहल क्यों गटका? जानिए शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ का चौंकाने वाला संदेश”

जनमत जागरण @सुसनेर। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के अंतर्गत, श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में गोकृपा कथा महोत्सव के 353वें दिवस पर भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर भानपुरा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने अपने आशीर्वचन में गूढ़ संदेश देते हुए कहा—

“भगवान शंकर ने हलाहल विष को अपने गले में रखा, न निगला, न उगला। हमें भी बुरी बातों और कुरीतियों को कान से सुनकर हृदय में नहीं उतारना चाहिए।”

धरती माता और गोमाता के प्रति कर्तव्य

शंकराचार्य जी ने दत्तात्रेय भगवान के आदर्शों को स्मरण कराते हुए कहा कि—
धरती माता से सहनशीलता और परोपकारिता सीखें।
गोमाता बिना कुछ लिए भी अमृतमय दूध, गोबर और गौमूत्र प्रदान कर पर्यावरण और स्वास्थ्य की रक्षा करती है।
मनुष्य अपने स्वार्थ में सबके हिस्से का अन्न खा रहा है, जिससे असंख्य जीवों का अस्तित्व खतरे में है।

353वें दिवस पर संतों का सान्निध्य

इस पावन अवसर पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज सहित संतों ने शंकराचार्य जी की चरण पादुका का पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के प्रबंध न्यासी अंबालाल सुथार, कार्यकारी अधिकारी आलोक सिंहल, क्षेत्रीय निदेशक ब्रह्मदत्त व्यास सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

चुनरी यात्रा— बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश से श्रद्धालु पहुंचे

गोकृपा कथा के 353वें दिवस पर बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश से भक्त चुनरी यात्रा लेकर आए। उन्होंने भगवती गोमाता का पूजन, चुनरी समर्पण और यज्ञशाला की परिक्रमा कर गोसेवा का संकल्प लिया। अंत में सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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