गोमाता को मिला ‘राजमाता’ का सम्मान, लेकिन अधिकार कब? – गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज

जनमत जागरण @ सुसनेर। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के प्रथम दिवस पर पूज्य गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज ने कहा कि जैसे वर्षा की बूंदों को गिना नहीं जा सकता, वैसे ही गौमाता के गुणों की गणना नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गौमाता को मात्र एक साधारण प्राणी समझते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में उनका स्थान दिव्य और पूजनीय है।
गोसेवा से मिलेगा साक्षात भगवान का दर्शन
महाराज जी ने कहा कि यदि किसी को साक्षात भगवान के दर्शन करने हैं, तो उसे गौसेवा करनी होगी। विक्रम संवत् 2082 के प्रथम दिवस पर गोमाता के प्रथम दर्शन कर आनंद की अनुभूति हुई, क्योंकि यह तीर्थ अब ‘सिद्ध तीर्थ’ बन चुका है। उन्होंने बताया कि जहां सेवा होती है, वहां भगवान स्वयं साधन प्रदान करते हैं और मध्यप्रदेश के पहले गो अभयारण्य में शासन और समाज, दोनों की सहभागिता से 6700 गोवंश स्वस्थ और प्रसन्न हैं।
हर राज्य में बने गो अभयारण्य
महाराज जी ने भारत सरकार और सभी राज्यों की सरकारों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर हर राज्य में एक-एक गो अभयारण्य स्थापित किया जाए। यदि सभी राज्यों में शासन एवं समाज मिलकर गोपालानंद जी महाराज जैसे संतों के सानिध्य में गोसेवा करें, तो गोमाता को स्वतः सम्मान प्राप्त हो जाएगा।
चुनरी यात्रा में उमड़ा भक्ति भाव
महामहोत्सव में पूरे वर्षभर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से गौमाता के लिए चुनरी यात्रा निकाली गई। महाराज जी ने कहा कि जिस भाव से अपनी मां या बहन को ओढ़नी ओढ़ाई जाती है, वही भाव गौमाता को चुनरी समर्पित करने में देखा गया। इससे यह स्पष्ट है कि जिन्होंने गोमाता को चुनरी अर्पित की है, वे उन्हें कष्ट नहीं देंगे।
गर्मी में गौसेवा का संकल्प लें
गर्मी के मौसम को देखते हुए महाराज जी ने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि वे जहां भी हों, गौमाता के पीने के पानी की व्यवस्था अवश्य करें। उन्होंने कहा कि गोमाता को जल अर्पण करने से ठाकुरजी प्रसन्न होते हैं। साथ ही सत्संग, मंदिर एवं गोशालाओं में अकेले न जाकर परिवार और समाज को भी साथ ले जाने की अपील की, ताकि अधिकाधिक लोग पुण्य के भागी बनें।
राजनेताओं को दोहरा रवैया छोड़ने की सलाह
महाराज जी ने देश के राजनेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि बड़े नेता अपने घरों में गौमाता रखकर या उन्हें रोटी खिलाकर फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन जब गौमाता को सम्मान देने की बात आती है, तो वे मौन साध लेते हैं। उन्होंने उन राज्यों को भी याद दिलाया, जिन्होंने गौमाता को ‘राजमाता’ का दर्जा दिया है, लेकिन अधिकार नहीं दिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे गौमाता को सिर्फ वोटों के लिए इस्तेमाल न करें।
महामहोत्सव का भव्य आयोजन
उपसंहार उत्सव के प्रथम दिवस पर श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास के न्यासी बोर्ड, केंद्रीय कार्यकारिणी एवं सुरभि प्रज्ञा परिषद की बैठक संध्या 6 बजे से 8 बजे तक गो अभयारण्य में संतो के सानिध्य में आयोजित की जाएगी।
इसके अलावा राजस्थान के बीकानेर, झालावाड़, राजगढ़ और मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु चुनरी यात्रा लेकर पहुंचे। बीकानेर के देरासर से रामलाल गुसाईसर और हुक्माराम भाई, झालावाड़ के बोलियाबारी ग्रामवासियों, सुसनेर के सालरिया और गावड़ी से श्रद्धालु विशेष भक्ति भाव के साथ पहुंचे। खासकर मनीषा और रघुवीर, जिन्होंने अपने दिवंगत पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए भगवती गोमाता के लिए चुनरी समर्पित की, वे इस आयोजन का विशेष केंद्र बने।
समापन के अवसर पर सभी ने गो पूजन, यज्ञशाला परिक्रमा एवं गोसेवा कर गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



