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सुसनेर में भगवान महावीर का जन्मकल्याणक पर्व धूमधाम से मना, रजत पालकी में निकले प्रभु, गूंजा अहिंसा का जयघोष


‘जियो और जीने दो’ के अमृत संदेश के साथ सुसनेर में गूंजा अहिंसा का जयघोष | भगवान महावीर के जन्मकल्याणक पर निकला श्रद्धा से सराबोर चल समारोह

जनमत जागरण @ सुसनेर।
त्रिशला नंदन भगवान महावीर स्वामी के जन्मकल्याणक पर्व पर सुसनेर नगर गुरुवार को अहिंसा, संयम और सहअस्तित्व के दिव्य संदेश से ओतप्रोत हो उठा। ‘जियो और जीने दो’ का पावन मंत्र लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब चल समारोह के रूप में नगर के मार्गों से गुज़रा, जिसने नगर को एक दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

शुभ्र वेश में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
श्वेत वस्त्रों में पुरुष, केसरिया परिधान में महिलाएं और पवित्र वस्त्रों में सजे युवक-युवतियां अपने हाथों में अहिंसा के प्रतीक लेकर प्रभात वेला से ही चल समारोह में शामिल हुए। पूरा नगर जयकारों और मंगल ध्वनियों से गूंज उठा – “त्रिशला नंदन वीर की जय”, “अहिंसा परम धर्म है” जैसे उद्घोष आत्मा को आंदोलित कर रहे थे।

महावीर का जीवन – अधिकार और कर्तव्य का संतुलन
शोभायात्रा के दौरान आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री समत्व सागर जी ने कहा – “जिसने संसार के अशांत जीवों को शांति का मार्ग दिखाया, वही है महावीर। उनका संदेश सिर्फ विचार नहीं, जीवन का संपूर्ण दर्शन है। यह हमें अधिकार भी देता है और दूसरों के अधिकारों की रक्षा करने का कर्तव्य भी।”

“महावीर को मानो या ना मानो, पर महावीर की जरूर मानो”
विज्ञाश्री माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा – “जहां देव, शास्त्र और गुरु का संग होता है, वहीं मंगल होता है। भगवान महावीर को मानना वैकल्पिक हो सकता है, लेकिन उनके सिद्धांतों को मानना अनिवार्य है – वही सच्चे धर्म की राह है।”

रजत पालकी में नगर भ्रमण पर निकले भगवान महावीर
दोपहर 3 बजे शुक्रवारिया बाजार स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर से भगवान महावीर की प्रतिमा को रजत पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण के लिए ले जाया गया। पालकी के आगे महिलाएं मंगल गीत गाती रहीं और पीछे श्रद्धालु नृत्य करते चले। नगरवासियों ने अपने घरों पर दीप, पुष्प और आरती से श्रीजी का स्वागत किया।

तीर्थ के लाभार्थी हुए शामिल, हुई गोद भराई
इस चल समारोह में मंदसौर जिले के बही पार्श्वनाथ तीर्थ पर पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान भगवान के माता-पिता बने लाभार्थी परिवार भी सुसज्जित बग्गियों में शामिल हुए। नगरवासियों ने इन परिवारों की गोद भराई की। मंदिर परिसर में पारंपरिक हल्दी-मेहंदी की रस्म भी संपन्न हुई।

श्रद्धा, सेवा और समर्पण का समापन सामूहिक भोज से
शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई त्रिमूर्ति मंदिर पहुंची, जहां श्रीजी का अभिषेक एवं सामूहिक धर्मसभा आयोजित की गई। संचालन आशीष त्यागी ने किया और मंगलाचरण ललित सांवला ने प्रस्तुत किया। अंत में सामूहिक वात्सल्य भोज के साथ आयोजन का समापन हुआ, जो एक अध्यात्ममय स्मृति बनकर नगरवासियों के हृदय में अंकित रह गया।


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