‘आयान्तु प्राणा:’ – शिव-गोरा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव प्रारंभ, कलश यात्रा में प्रकट हुई श्रद्धा की गंगा

‘प्राण आएं, चेतना जगे’ – शिवधाम में गूंजा वैदिक स्वर, नगर हुआ भक्तिमय
जानिए कैसे शुरू हुआ तीन दिवसीय शिव-गोरा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
जनमत जागरण @ सोयतकलां
‘आयान्तु प्राणा: प्राणाय नमः’ – प्राण आएं, प्राणस्वरूप भगवान को नमस्कार हो।
इस वैदिक मंत्र की दिव्य ध्वनि जैसे ही नवनिर्मित शिवधाम में गूंजी, पावन चेतना का संचार मूर्तियों में ही नहीं, पूरे वातावरण में महसूस होने लगा। ऐसा लगा मानो साक्षात शिव और माता पार्वती नगरवासियों के बीच प्रकट हो उठे हों।

शनिवार, 12 अप्रैल को नगर के पिड़ावा रोड स्थित ठाकुर विजयपाल सिंह जादौन स्व निवास परिसर, रमन बिहारी मंदिर के समीप नव निर्मित शिव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय शिव-गोरा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ, हनुमान जयंती के पावन अवसर पर कलश यात्रा के साथ हुआ।
भोर की बेला में जब श्रद्धालुओं की पंक्तियों में महिलाएं सिर पर कलश लिए मंदिर प्रांगण से निकलीं, तो हर दिशा भक्तिभाव से सराबोर हो उठी। कलश यात्रा में जादौन परिवार, नगर की धार्मिक संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालुओं की सहभागिता ने एक अनुपम आध्यात्मिक दृश्य रचा।
नगर भ्रमण करती हुई यात्रा का स्वागत जगह-जगह पुष्पवर्षा और भजन कीर्तन से किया गया। यह यात्रा पुनः शिव मंदिर प्रांगण में समर्पण भाव से संपन्न हुई।

अनुष्ठान की दिव्य रूपरेखा इस प्रकार है:
- 12 अप्रैल (शनिवार): वैदिक मंत्रों के साथ कलश यात्रा, मंडप प्रवेश, पूजन
- 13 अप्रैल (रविवार): महा अभिषेक, अन्नाधिवास, हवन एवं यज्ञीय क्रियाएं
- 14 अप्रैल (सोमवार): शोभा यात्रा, पूर्णाहुति, भव्य महाआरती और दोपहर 12 बजे से महाप्रसादी वितरण
पूरे महोत्सव में पं. सीताराम शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक परंपरा अनुसार मंत्रोच्चार और यज्ञ विधि द्वारा भगवान शिव एवं माता गोरा पार्वती की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न की जा रही है।

शिव महोत्सव में आमंत्रण:
जादौन परिवार की ओर से नगर वासियों एवं समस्त श्रद्धालुजनों से विनम्र आग्रह है कि वे 14 अप्रैल को आयोजित भव्य महा आरती एवं प्रसादी वितरण में सपरिवार पधार कर पुण्य लाभ प्राप्त करें।
शिव स्तुति की एक पंक्ति समर्पित:
“नमः शिवाय ते तुभ्यं, त्रैलोक्यं मंगलं कुरु।”
(हे शिव! आपको नमस्कार, समस्त तीनों लोकों का मंगल कीजिए।)
– जनमत जागरण, सोयतकलां



