सच की आवाज़’ नामक फर्जी फेसबुक आईडी से झूठ फैलाने वाला युवक गिरफ्तार, पीएम और संगठनों पर करता था अपमानजनक पोस्ट

फेसबुक के ‘फेस’ के पीछे चल रही ‘सच की आवाज़’ हुई बेनकाब
प्रधानमंत्री व संगठनों के खिलाफ झूठ फैलाने वाला संतोष बैरागी पहुँचा सलाखों के पीछे
सुसनेर (जनमत जागरण)।
सोशल मीडिया पर वर्षों से गुमनाम रूप से देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, जनप्रतिनिधियों, हिंदूवादी संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों की छवि धूमिल करने वाली फेसबुक आईडी ‘सच की आवाज़’ के असली चेहरे का आखिरकार पर्दाफाश हो गया है। इस आईडी का संचालन करने वाला आरोपी संतोष बैरागी अब न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत जेल की सलाखों के पीछे है।
संतोष बैरागी, निवासी ग्राम नांदना, के विरुद्ध सरपंच संघ ब्लॉक अध्यक्ष विक्रमसिंह परमार द्वारा की गई शिकायत के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाई और तीन दिन के भीतर ही इस सोशल मीडिया आधारित लंबे अपराध सिलसिले का पटाक्षेप कर दिया।
आरोपी के विरुद्ध दर्ज हैं गंभीर अपराध
थाना प्रभारी केसर राजपूत ने बताया कि संतोष बैरागी कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि वह एक आदतन अपराधी है। पूर्व में उस पर सुसनेर थाने में विभिन्न धाराओं के तहत कई प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अपहरण, धमकी, जातीय अपमान और शासकीय कार्य में बाधा जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
फेसबुक से फैलाया जा रहा था भ्रम और नफरत
‘सच की आवाज़’ नामक फर्जी फेसबुक आईडी से संतोष बैरागी द्वारा भ्रामक, तथ्यहीन और आपत्तिजनक पोस्ट लगातार डाली जा रही थीं। इन पोस्टों का मकसद समाज में भ्रम फैलाना, राजनेताओं और संगठनों की साख को चोट पहुँचाना और आमजन में अविश्वास का वातावरण खड़ा करना था।
तीन दिन में खुल गई वर्षों पुरानी परतें
यह सिलसिला बीते 4-5 वर्षों से चल रहा था, लेकिन आरोपी तक पुलिस की पहुँच नहीं हो पा रही थी। सरपंच संघ अध्यक्ष द्वारा हाल ही में की गई ताज़ा शिकायत और उसके समर्थन में विभिन्न संगठनों व गणमान्य नागरिकों द्वारा किए गए प्रतिवेदनों के परिणामस्वरूप पुलिस ने गंभीरता से जाँच शुरू की और केवल तीन दिनों में आरोपी को पकड़कर एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
थाना प्रभारी का बयान
“संतोष बैरागी के विरुद्ध पहले भी कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। ‘सच की आवाज़’ नामक फेसबुक आईडी से वह भ्रामक पोस्टें कर रहा था, जिसकी पुष्टि उसने स्वयं की है। उसे शनिवार को गिरफ़्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहाँ से उसे जेल भेजा गया।”
— केसर राजपूत, थाना प्रभारी, सुसनेर
सार्थक दृष्टिकोण ::
फर्जी पहचान और झूठी पोस्टों से सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता। सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का मंच है, अफवाहों का अड्डा नहीं।‘सच की आवाज़’ के नाम पर झूठ फैलाने वाला अब सलाखों के पीछे है – यह चेतावनी है हर उस सोच के लिए जो आज़ादी की आड़ में अराजकता फैलाना चाहती है।



