सालरिया गो अभयारण्य में श्री कामधेनु गुरुकुलम की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ | हनुमान जन्मोत्सव से हुई शुरुआत, सीएम डॉ. मोहन यादव ने की थी घोषणा

गो अभयारण्य के श्री कामधेनु गुरुकुलम में प्रवेश प्रारंभ
संस्कार, शिक्षा और संस्कृति से सुसज्जित नवयुग की ओर एक कदम
जनमत जागरण@ सुसनेर| 16 अप्रैल
विश्व के प्रथम गो अभयारण्य—सालरिया गो अभयारण्य—में अब भावी पीढ़ियों के लिए शिक्षा और संस्कार का नया सूर्योदय हो चुका है। गोवंश रक्षा वर्ष के तहत आयोजित एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के पावन समापन अवसर पर, मध्यप्रदेश शासन के संरक्षण में स्थापित श्री कामधेनु गुरुकुलम में प्रवेश प्रक्रिया विधिवत रूप से प्रारंभ हो चुकी है।
12 अप्रैल, हनुमान जन्मोत्सव के पावन दिन इस प्रवेश प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उनके जन्मदिवस (25 मार्च) पर गो सेवा में संलग्न ग्वालों के बालकों एवं मेधावी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य हेतु आरंभ की गई अभिनव पहल है। गुरुकुलम में कक्षा 1 से 5 तक के लिए अनिवासीय तथा कक्षा 6 से 8 तक के लिए आवासीय शिक्षा की व्यवस्था की गई है। प्रवेश हेतु इच्छुक अभिभावक गो अभयारण्य प्रबंधन कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
इस अद्वितीय गुरुकुलम की स्थापना केवल शैक्षणिक उद्देश्य नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, वेद परंपरा, गौ-संरक्षण और संस्कारित जीवन मूल्यों को आत्मसात कराने की दिशा में किया गया एक युगांतरकारी प्रयास है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने भोपाल में आयोजित सहकारिता सम्मेलन में गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के समक्ष अभयारण्य की उपलब्धियों और इस गुरुकुलम की जानकारी साझा कर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।
अब प्रारंभ हुआ – अखंड गो महिमा कथा का तीन दशक लंबा अनुष्ठान
12 अप्रैल को वेदलक्षणा महोत्सव के विश्राम के साथ ही अगले 30 वर्षों तक चलने वाली ‘अखंड गो महिमा कथा’ का शुभारंभ हो गया है, जो प्रतिदिन संध्या 7 बजे से 8 बजे तक संतों और वेदज्ञ विद्वानों के सान्निध्य में संपन्न होगी।
गो अभयारण्य के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. विक्रम सिंह ने क्षेत्र के समस्त गौसेवकों, अभिभावकों और समाज के जागरूक नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों के बच्चों को 7000 गौमाताओं के दिव्य सान्निध्य में अध्ययन हेतु कामधेनु गुरुकुलम में प्रवेश दिलाकर एक संस्कारशील, गौरवशाली और भारतमय भविष्य के निर्माण में भागीदार बनें।



