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“गाय घर में आएगी, स्वास्थ्य और समृद्धि साथ लाएगी – पूर्व विधायक संतोष जोशी की गोसेवा पदयात्रा”

घर-घर गाय योजना: सेवा का संकल्प और संवेदना की पदयात्रा

पूर्व विधायक संतोष जोशी ने की घोषणा, मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने निकलेंगे पैदल

सुसनेर | जनमत जागरण ब्यूरो
“गाय की पूजा नहीं, सेवा ही सच्चा पूण्य है।” — इसी मंत्र को लेकर मध्यप्रदेश की धरती पर एक नई सामाजिक चेतना का संचार हुआ है। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गोवंश संरक्षण के लिए घोषित योजना ने उन हजारों पशुपालकों और गोसेवकों को नई ऊर्जा दी है, जो वर्षों से इस विषय को समाज के केंद्र में लाने का प्रयास कर रहे थे।

“वंदे गौ मातरम्!”
यह केवल उद्घोष नहीं, बल्कि एक चेतना है, एक पुकार है – जो आज फिर जाग उठी है। यह पुकार है गौ माता के सम्मान की, पर्यावरण के संरक्षण की, संस्कृति के पुनरुद्धार की, और मानव मूल्यों की पुनर्स्थापना की।

पूर्व विधायक और मध्यप्रदेश गो संवर्धन बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष संतोष जोशी ने आज सुसनेर के डाक बंगले में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी कि वे स्वयं इस ऐतिहासिक योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताने हेतु 21 अप्रैल से मां बगलामुखी मंदिर (नलखेड़ा) से भोपाल तक पदयात्रा करेंगे। यह यात्रा न केवल आभार की अभिव्यक्ति है, बल्कि गोसेवा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का एक समर्पित प्रयास भी है।


दूरदर्शी योजना का गहरा सामाजिक और जैविक प्रभाव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने जन्मदिवस पर सालरिया गो-अभयारण्य में की गई घोषणा — “जो व्यक्ति 10 गोवंश की सेवा करेगा, उसे ₹40 प्रतिदिन प्रति गोवंश प्रोत्साहन राशि दी जाएगी” — केवल एक सरकारी सहायता योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक नई दिशा देने वाला क्रांतिकारी विचार है।
संतोष जोशी ने इसे मुख्यमंत्री की ‘घर-घर गाय’ संकल्पना की शुरुआत बताते हुए कहा:

“गाय अब गौशालाओं में नहीं, किसानों के आंगन में बचेगी। जब घरों में गाय आएगी, तो दूध आएगा, गोबर आएगा, खेतों में जैविक खाद जाएगा, फसलें स्वस्थ होंगी, और शरीर भी। यह योजना सिर्फ गोवंश संरक्षण की नहीं, यह प्राकृतिक खेती, पोषण, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की नींव है।”

उन्होंने भावुक होकर कहा, “आज स्थिति यह है कि लोगों ने गाय को सिर्फ घर से नहीं, दिलों से भी निकाल दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री यादव की यह घोषणा एक ऐसा भावनात्मक और व्यावहारिक सेतु है, जिससे सड़कों पर भटकता ‘गोविंद’ अब फिर से घरों में सम्मान से लौटेगा।”


यात्रा का उद्देश्य और आह्वान

संतोष जोशी की यह पदयात्रा एक प्रतीकात्मक संदेश है कि जब सरकार और समाज एकजुट होकर गोसेवा को जीवन सेवा का माध्यम मानते हैं, तब परिवर्तन अवश्यंभावी है।
वे इस यात्रा को “धन्यवाद यात्रा नहीं, गोमाता के प्रति पुनर्संवेदना की यात्रा” मानते हैं। उन्होंने आमजन से आग्रह किया कि जिनके पास ऐसे गोवंश हैं जो सड़कों पर भटक रहे हैं, वे उन्हें अपने घरों में स्थान दें और इस योजना का लाभ उठाएं।


यात्रा मार्ग और सहयोग का आह्वान

यह यात्रा 21 अप्रैल, वैशाख कृष्ण अष्टमी को मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा से प्रारंभ होकर 27 अप्रैल को भोपाल पहुंचेगी। हर दिन लगभग 10-15 किलोमीटर की पदयात्रा होगी, जिसमें स्थानीय नागरिक अपने सामर्थ्य अनुसार 1 घंटे, 1 दिन या पूरी यात्रा में सहभागी बन सकते हैं।

श्री जोशी ने बताया कि यह यात्रा एक संकल्प है, और जो बंधु इस गोसेवा यज्ञ में सहभागी बनना चाहते हैं, वे इस राष्ट्रधर्म में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

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