'सार्थक' दृष्टिकोणसम्पादकीय

सिंधु संधि : जल की धार से वार: मोदी सरकार ने चुपचाप पाकिस्तान की नाड़ी कसी! – अब जल ही बना भारत का शस्त्र!

✍️ संपादक की कलम से

💦 सिंधु जल पर निर्णायक कार्रवाई: यह कोई चौंकाने वाला बयान नहीं, बल्कि वर्षों की चुपचाप चलती ‘जल-क्रांति’ है

जब-जब भारत कोई ऐतिहासिक और राष्ट्रहितकारी निर्णय लेता है, तब-तब कुछ स्वघोषित विशेषज्ञ नींद से जागकर टेलीविजन स्टूडियो में ‘आशंका और आलोचना’ का नया अध्याय खोल देते हैं।

हाल ही में जब सिंधु जल समझौते को लेकर निर्णायक क़दम उठाया गया, तो किसी ने ‘बड़े पंप’ लगाने की बात कही, किसी ने इस कार्य को ‘देर से उठाया गया कदम’ बताया, और कुछ ने इसे ‘आंखों में धूल झोंकना’ तक कह डाला।

लेकिन वे शायद भूल गए कि 2016 में उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प लिया था — “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” वह कोई जुमला नहीं था, बल्कि भारत की जल-नीति का वो मौन शंखनाद था, जिसकी ध्वनि अब प्रतिध्वनित हो रही है।

👁️ आइए तथ्यों की आंखों में आंखें डालें और देखें कि पिछले 10 वर्षों में किस प्रकार एक-एक बूँद को राष्ट्रशक्ति में बदला गया:

  • किशनगंगा परियोजना (झेलम की सहायक नदी): 2018 में 23 किमी लंबी सुरंग से पानी की धारा मोड़ दी गई — यह एक इंजीनियरिंग चमत्कार से कम नहीं।
  • रतले परियोजना (चिनाब पर): वर्षों तक रुकी रही यह परियोजना 2021 में फिर से शुरू हुई — पाकिस्तान की धड़कनों को धीमा करने वाला कदम।
  • तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट (झेलम पर): 2016 से इसे पुनर्जीवित कर प्रवाह पर नियंत्रण कायम किया गया।
  • शाहपुरकंडी बांध (रावी पर): 2018 से कार्य प्रगति पर — एक और जल-शक्ति का स्रोत।
  • उज्ह बहुउद्देशीय परियोजना (रावी की सहायक नदी): 2020 से निर्माणाधीन — जो आने वाले समय में पाकिस्तान के खाद्य भंडार को सींचने वाला जल रोक सकेगा।

ये परियोजनाएं सिर्फ बांध नहीं हैं, यह उस ऐतिहासिक भूल का उत्तर हैं, जिसे 50 के दशक में सिंधु जल संधि के रूप में दर्ज किया गया। ये वो सधी हुई चालें हैं, जो बिना युद्ध के शत्रु की जीवनरेखा पर नियंत्रण स्थापित करती हैं।

💦 आज पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के खेत पानी को तरस रहे हैं, और भारत अपने अधिकारों को इस्तेमाल करते हुए शांति से, लेकिन रणनीतिक रूप से, उसकी नींव हिला रहा है।

कूटनीति की भाषा में इसे ‘वॉटर वॉरफेयर’ नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट स्ट्रेटेजिक शटडाउन’ कहा जा सकता है।

यह समझना ज़रूरी है — रणनीति वह नहीं जो टीवी पर बहस में दिखे, रणनीति वह है जो इतिहास की धारा मोड़ दे, बिना ध्वनि किए।

भारत ने ना सिर्फ अपनी जल-धारा को मोड़ा है, बल्कि भविष्य की भू-राजनीति की दिशा भी तय की है।

🇮🇳 यह वही भारत है — जो शोर नहीं करता, पर उसकी हर लहर इतिहास की चट्टानों को काटती है।

✍️ राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
पत्रकार | शिक्षक | राष्ट्रभक्त विचारक | जनमत जागरण न्यूज़ पोर्टल संपादक

✒️ सार्थक चिंतन

“विवाद से नहीं, विवेक से चलने वाली नीतियां इतिहास रचती हैं। भारत ने युद्ध नहीं छेड़ा, पर जल की हर बूँद को राष्ट्र रक्षा में बदल दिया — यह है ‘नवभारत की नई रणनीति’।”

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