'सार्थक' दृष्टिकोणराजीव जी दीक्षित स्वास्थ्य श्रृंखलाहेल्थ

डियोड्रेंट और परफ्यूम – शरीर की खुशबू या धीमा ज़हर? | राजीव दीक्षित के स्वास्थ्य चिंतन से जानिए इसका सच

भाग 18

डियोड्रेंट और परफ्यूम – खुशबू या हानिकारक रासायनिक हमला?

शरीर की गंध छुपाने की चाहत में… क्या सांसों से ज़हर ले रहे हैं हम?


हम सब महकना चाहते हैं… लेकिन किस कीमत पर?

सुबह नहाने के बाद डियो, शाम को पार्टी में परफ्यूम, ऑफिस में बॉडी स्प्रे… आधुनिक जीवनशैली में खुशबू जैसे सामाजिक औपचारिकता बन गई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन महकते रसायनों में आपके शरीर के लिए कितना ज़हर छुपा है?

हम कपड़ों और शरीर पर छिड़कते हैं ऐसे रसायनों को जो सीधे त्वचा और सांसों के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, और फिर शुरू होता है बीमारियों का एक लंबा, अदृश्य सिलसिला


राजीव दीक्षित जी की चेतावनी:

“गंध, शरीर की भाषा है। पसीना, शरीर का शुद्धिकरण है। उसे दबाना नहीं, समझना चाहिए।”

राजीव जी कहते हैं कि प्राकृतिक गंध को रासायनिक तौर पर ढँकना शरीर की चयापचय प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाना है। विशेष रूप से, बगलों में स्प्रे किए गए एल्यूमिनियम युक्त डियोड्रेंट शरीर के स्वेट ग्लैंड्स को बंद कर देते हैं, जिससे शरीर के विष बाहर नहीं निकल पाते।


रासायनिक विश्लेषण: खुशबू में छुपा ज़हर

एल्यूमिनियम कंपाउंड्स – डियोड्रेंट में मुख्य घटक; लंबे प्रयोग से स्तन कैंसर की संभावना बढ़ सकती है।

Parabens – एंडोक्राइन डिसरप्टर; हार्मोनल गड़बड़ियों और थायरॉइड रोग से जुड़े।

फ्थैलेट्स (Phthalates) – सांस के ज़रिए शरीर में जाकर फेफड़ों और यकृत पर असर डालते हैं

Synthetic Musks – यूरोप में कई देशों में प्रतिबंधित, फिर भी भारत में खुलेआम बिक्री।


बढ़ती बीमारी के आँकड़े – एक वैज्ञानिक दृष्टि

  • स्तन कैंसर भारत में महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है – WHO के अनुसार हर 28 में से 1 महिला को यह हो सकता है
  • कई अध्ययन बताते हैं कि लगातार डियोड्रेंट प्रयोग करने वाली महिलाओं में बगल के पास गांठों की शिकायत अधिक होती है
  • परफ्यूम और स्प्रे में मौजूद वाष्पशील तत्वों से अस्थमा, एलर्जी, माइग्रेन, और थकान आम लक्षण बनते जा रहे हैं।

क्या विकल्प है हमारे पास?

  1. देसी इत्र – चंदन, गुलाब, केवड़ा से बने शुद्ध सुगंधित तेल।
  2. फिटकरी या नींबू – प्राकृतिक डिओड्राइज़र।
  3. गौमूत्र आधारित हर्बल स्प्रे – कई संस्थान आज इसका निर्माण कर रहे हैं।
  4. नारियल तेल में कपूर या चंदन मिश्रण – शरीर पर लगाने से सौम्य गंध और एंटीबैक्टीरियल असर।

सार्थक चिंतन:

जब तक हम अंग्रेज़ी गंध की चाहत में अपने शरीर को ज़हरीला बनाते रहेंगे, तब तक स्वास्थ्य की राह कठिन ही रहेगी।
अब समय है देसी जीवनशैली को अपनाने का, जहां गंध प्राकृतिक हो, और जीवन रसायनमुक्त

आपको राजीव जी दीक्षित की यह लेखमाला “स्वास्थ्य संकल्प – 365 दिन” कैसी लग रही है?
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