'सार्थक' दृष्टिकोणराजीव जी दीक्षित स्वास्थ्य श्रृंखलाहेल्थ

RO और बोतलबंद पानी – क्या ‘शुद्ध’ के नाम पर शरीर से छीने जा रहे हैं जीवनदायी खनिज?राजीव दीक्षित के शोधों के आधार पर – एक वैज्ञानिक और वैदिक विवेचन

भाग 19: आरओ और बोतलबंद पानी – शुद्धि का छलावा या मिनरल्स की लूट?

राजीव दीक्षित के शोधों के आधार पर – एक वैज्ञानिक और वैदिक विवेचन


“जल ही जीवन है” – यह कहावत हम सबने सुनी है। लेकिन क्या आज जो जल हम पी रहे हैं, वह सचमुच जीवनदायी है या फिर सिर्फ एक छलावा?

आजकल हर घर में RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीन लगी है, और बाज़ार में बोतलबंद पानी हर नुक्कड़ पर बिकता दिखाई देता है। हर कोई सोचता है कि वह ‘शुद्ध’ पानी पी रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह ‘शुद्धता’ वास्तव में कैसी है?


RO पानी – साफ़ तो है, लेकिन जीवित नहीं!

राजीव दीक्षित ने अपने शोध और व्याख्यानों में बार-बार चेताया कि RO मशीन पानी के साथ सिर्फ गंदगी ही नहीं, बल्कि उसके जीवनदायी खनिज भी छान कर बाहर फेंक देती है।

  • RO 90% से अधिक मिनरल्स को हटा देता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने साफ कहा है कि मिनरल्स रहित पानी दीर्घकालिक रूप से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
  • ऐसे पानी में TDS (Total Dissolved Solids) 30-40 ppm तक पहुंच जाता है, जबकि प्राकृतिक जल में यह 300-500 ppm होता है।

राजीव जी ने इसे ‘मृत जल’ कहा है – एक ऐसा जल, जिसमें जीवन के लिए आवश्यक कोई तत्व ही नहीं बचा।


बोतलबंद पानी – ब्रांडेड विष?

बाजार में मिलने वाला बोतलबंद पानी देखने में साफ, ठंडा और भरोसेमंद लगता है – लेकिन हकीकत कुछ और है:

  • अधिकतर बोतलें प्लास्टिक की होती हैं, और तापमान में बदलाव से प्लास्टिक से बीपीए (Bisphenol-A) जैसे रसायन पानी में घुल जाते हैं।
  • कई कंपनियाँ RO फिल्टर्ड + ओज़ोनाइज्ड पानी देती हैं, जिसमें न तो खनिज होते हैं, न कोई जैविक ऊर्जा।
  • एक लीटर बोतलबंद पानी बनाने में 3 से 5 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।

राजीव दीक्षित जी इसे पानी का बाज़ारीकरण और प्राकृतिक संसाधनों की लूट मानते थे।


तो फिर समाधान क्या है?

राजीव जी का सुझाव था:

  • क्लोरीन मुक्त, उबला और छाना हुआ सामान्य जल सबसे बेहतर है।
  • तांबे के पात्र में रखा जल रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।
  • रेतीले नलकूप का पानी, कुएँ का जल और पहाड़ी स्रोतों का जल – मिनरल्स से भरपूर और जीवनदायी होता है।
  • TDS 200-500 ppm के बीच होना सर्वोत्तम माना गया है।

वर्तमान स्थिति – क्या कहती है वैज्ञानिक रिपोर्टें?

  • एक हालिया शोध के अनुसार, भारत में RO के अत्यधिक प्रयोग के कारण लाखों लोग मिनरल डिफिशिएंसी (जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम) से ग्रस्त हैं।
  • WHO की रिपोर्ट (2022): “Low mineral water causes higher risks of cardiovascular diseases, neurological disorders, and even cancer.”

सार्थक चिंतन

राजीव जी दीक्षित के विचार केवल चेतावनी नहीं, समाधान भी हैं। उन्होंने वर्षों पहले यह कह दिया था कि आने वाले समय में जल को सबसे पहले ज़हर बनाया जाएगा – और वही आज हमारी आँखों के सामने हो रहा है।

क्या अब भी हम आँखें मूँदकर RO और बोतलबंद जल का उपयोग करते रहेंगे?

आपका शरीर, आपकी अगली पीढ़ी और इस धरती की रक्षा आपसे ही शुरू होती है।


आपको “स्वास्थ्य संकल्प – 365 दिन” की यह लेखमाला कैसी लग रही है?
कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।
आपका सुझाव ही हमारी ऊर्जा है।

लेख संकलन एवं संपादन: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
मूल स्रोत प्रेरणा: स्व. राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान, शोध एवं स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर आधारित
प्रकाशन: जनमत जागरण न्यूज़ पोर्टल – “स्वास्थ्य संकल्प – 365 दिन” लेखमाला के अंतर्गत
उद्देश्य: भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक विवेक और जन-जागरूकता के माध्यम से स्वस्थ भारत का निर्माण।

Related Articles

error: Content is protected !!