पहलगाम हमले पर साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती का आक्रोश: “हिंदू अब भी चुप रहे तो अगला निशाना हर घर होगा”

“हिंदू होने पर गोलियों से छलनी किया जाना क्या इस देश की आत्मा पर हमला नहीं?” — श्रद्धा गोपाल सरस्वती
जनमत जागरण @ गोअभयारण्य (सुसनेर), 25 अप्रैल : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण हमले में धर्म पूछकर निर्दोष हिन्दू यात्रियों को गोलियों से भून दिया गया, जिससे पूरा सनातन समाज आहत है। इस घटना के बाद सुसनेर जनपद की ग्राम पंचायत सालरिया स्थित गो अभयारण्य में आयोजित श्री शनिदेव व नवग्रह मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जिसमें गोपाल परिवार संघ की वरिष्ठ साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने गहन और संवेदनशील उद्बोधन दिया।
साध्वी जी ने कहा—
“जिस देश में सवा सौ करोड़ हिंदू रहते हों, वहां धर्म पूछकर हिंदुओं की हत्या कर दी जाए, तो यह केवल आतंकवाद नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति पर सीधा प्रहार है। पहलगाम की घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई सुरक्षित हैं?”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब यह वक्त बयानों या राजनीति का नहीं, सक्रिय प्रतिकार का है।
साध्वी जी ने भावुक होकर कहा:
“जब हमारी गोमाता रोज़ कट रही थी, तब हम चुप थे, अब हमारी बारी आ गई है। जब मां को काटने पर विरोध नहीं किया, तब खुद को कटने से कौन बचा सकता है?”
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अब हिन्दू समाज को एकजुट होकर दुश्मनों का प्रतिकार करना होगा, नहीं तो आने वाली पीढ़ियों को अस्तित्व बचाने के लिए या तो धर्म बदलना पड़ेगा या आत्मसमर्पण करना पड़ेगा।
साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने सरकार से की कड़ी कार्यवाही की मांग
साध्वी जी ने भारत सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा—
“अब वक्त आ गया है कि भारत सरकार उन आतंकियों और उनके मददगारों पर ऐसी कार्रवाई करे कि उनकी सात पुश्तें भी भारत की ओर आंख उठाकर देखने से डरें। लातों के भूत बातों से नहीं मानते, और जहां प्रेम नहीं होता, वहां गोली चलती है।”
हिंदू समाज की चुप्पी बन रही खतरा
साध्वी जी ने देश के सभी सनातनियों को चेताया कि अगर अब भी कोई सनातनी इन घटनाओं पर चुप रहता है तो उसकी भूमिका पर संदेह होना स्वाभाविक है। उन्होंने दो टूक कहा:
“अब केवल मीठे भाषणों और प्रवचनों का समय नहीं रहा, अब जवाब देना होगा।”
शक्ति की आराधना और संदेश
इस श्रद्धांजलि सभा के साथ-साथ चल रहे 21 कुंडीय शिव शक्ति महायज्ञ में यज्ञाचार्य पं. केदारदत्त व्यास (हिम्मतगढ़, राजस्थान) एवं उपाचार्य पं. मांगीलाल व्यास (सरखेड़ी, राजस्थान) के निर्देशन में प्रातः और सायंकालीन सत्रों में हवन, मूर्ति अभिषेक और नवग्रह पूजा जैसे अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न हुए।



