“23 साल की शादी, लेकिन अंजाम बना मौत – पत्नी के हत्यारे पति को उम्रकैद” – “पत्नी को दी मौत, अब उम्र भर सज़ा – पति को न्यायालय से करारा झटका”

23 साल की शादी, एक खतरनाक अंत – न्याय ने दिया जवाब
स्वास्थ्यकर्मी पत्नी की हत्या में पति को आजीवन कारावास, न्यायालय ने सुनाया सख्त संदेश
जनमत जागरण @सुसनेर।
एक ओर जहां विवाह को ‘सात जन्मों का बंधन’ माना जाता है, वहीं कुछ रिश्तों में जब संवाद की जगह संदेह और अहंकार ले लेते हैं, तो परिणाम घातक हो सकते हैं। ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला सुसनेर न्यायालय में सामने आया, जिसमें 23 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद एक पति ने अपनी पत्नी – जो कि स्वास्थ्य विभाग में एएनएम पद पर पदस्थ थी – की हत्या कर दी।
माननीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री अखिलेश कुमार धाकड़ ने इस मामले में आजीवन कारावास व 2000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाकर समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि घरेलू हिंसा किसी भी परिस्थिति में क्षम्य नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रेम परमार, अमरकोट में एएनएम के पद पर कार्यरत थीं। उनकी शादी सोयतकलां के द्वारकीलाल बागरी से हुई थी।
7 दिसंबर 2023 को मृतका के भाई भारतसिंह परमार ने थाना सोयत पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि बहन की मौत ‘करंट’ से हुई बताई गई, जबकि गले पर फांसी के निशान मिले थे। पुलिस व परिजनों को शक हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है।
पुलिस ने तत्काल प्रकरण दर्ज कर धारा 302 भादवि के अंतर्गत विवेचना प्रारंभ की। निरीक्षक रामचंद्र नागर व यशवंत राव गायकवाड ने गहन पड़ताल करते हुए केस को मजबूती से न्यायालय तक पहुँचाया।
प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय
शासकीय अधिवक्ता एजीपी मुकेश जैन चौधरी ने प्रभावशाली ढंग से पक्ष रखा। अभियुक्त के झूठ और बहानों की परतें कोर्ट में खुलती गईं, और अंततः अपराध सिद्ध हुआ।
प्रकरण में कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक आशीष सोनी व सहायक ग्रेड-3 कृष्णकांत अग्रवाल का भी अहम योगदान रहा।
जनमत जागरण की भूमिका
जनमत जागरण ने दिसंबर 2024 में इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया था और लगातार इसके अदालती घटनाक्रम पर भी निगरानी रखी।
समाज के लिए संदेश
- महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान हर घर की प्राथमिकता होनी चाहिए।
- लंबे वैवाहिक संबंध भी हिंसात्मक प्रवृत्ति से नहीं बचे रहते, यदि संवाद और संवेदनशीलता न हो।
- कानून अंधा नहीं है। देर से ही सही, न्याय अवश्य होता है।



