सुसनेर में चार जैन संघों का ऐतिहासिक समागम कल से, 26 साधु-साध्वियों के नगर प्रवेश की तैयारी पूरी

चार संघों के 26 तपस्वियों में 1 आचार्य, 11 मुनि, 2 क्षुल्लक व 12 आर्यिकाओं का सुसनेर में महा समागम
“जब संयम की चार धाराएँ एक साथ किसी नगर की ओर बढ़ती हैं, तो वह नगर केवल नगर नहीं रहता – वह तप, त्याग और धर्म की भूमि बन जाता है।”
सुसनेर में पहली बार चार अलग-अलग जैन संघों के साधु-साध्वियों का महामिलन होने जा रहा है। यह दिव्य संगम अब शनिवार और रविवार को अपने चरम पर होगा, जब 26 तपस्वी आत्माएँ नगर में पदविहार करते हुए प्रवेश करेंगी। सुसनेर के लिए यह पल इतिहास की पवित्र स्याही से लिखा जाने वाला अध्याय बनने वाला है।
पढ़िए, इस महा समागम की तैयारी पर सुसनेर से हमारे रिपोर्टर दीपक जैन की यह विशेष रिपोर्ट।
जनमत जागरण@सुसनेर। इतिहास रचने जा रहा है सुसनेर नगर — जहाँ पहली बार दिगम्बर जैन परंपरा के चार अलग-अलग संघों के साधु-साध्वियों का भव्य महामिलन होने जा रहा है। इंदौर की दिशा से पदविहार करते हुए आ रहे चारों संघों के 26 तपस्वियों का सुसनेर आगमन नगरवासियों के लिए एक पुण्य अवसर बन गया है।
नगर में प्रथम बार हो रहे इस समागम में तपस्वियों के साथ आर्यिकाओं का भी नगर प्रवेश होगा। यह दिव्य संगम दिगम्बर जैन त्रिमूर्ति मंदिर परिसर में शनिवार और रविवार को आयोजित होगा।

चारों संघों में होंगे ये प्रमुख साधु-साध्वीजन:
- गणाचार्य विराग सागर जी के शिष्य मुनि विवर्धन सागर जी ससंघ – कुल 6 साधु
- तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर जी के शिष्य आचार्य सुंदर सागर जी ससंघ – कुल 6 साधु
- आचार्य विनिश्चय सागर जी के शिष्य मुनि प्रज्ञान सागर जी ससंघ – कुल 2 साधु
- गणाचार्य विराग सागर जी की शिष्या आर्यिका विभा श्री ससंघ – कुल 12 आर्यिकाएं (2 आर्यिका + 10 क्षुल्लिका)
शनिवार प्रातः 7:30 बजे इन तीनों साधु संघों का त्रिमूर्ति मंदिर पर मिलन होगा, जहां भव्य अगवानी और स्वागत की तैयारी है। वहीं रविवार को प्रातः 7:30 बजे आर्यिका विभा श्री ससंघ नगर में मंगल प्रवेश करेंगी, जिसके बाद धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा।
संतों को लेने पहुँचे मुनिभक्त, सादर दिया सुसनेर आने का निमंत्रण
शुक्रवार को सुसनेर के जैन समाज के प्रतिनिधि व मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक जैन ‘मामा’, त्रिमूर्ति मंदिर के पूर्व अध्यक्ष महावीर जैन सालारिया, रमेश जयपद, बलवंतसिंह पांडे, विनोद जैन, अंकित जैन, मुकेश नाकेदार, सोमेश चौधरी, महावीर शास्त्री, अनेकांत जैन समेत अनेक श्रद्धालु साधु-साध्वियों के विश्राम पड़ाव आगर और महुड़िया पहुँचे। वहाँ सभी ने ससंघ गुरुजनों को श्रीफल भेंट कर सुसनेर आने का अनुरोध किया।
संत आगमन का यह दृश्य बनेगा नगर की आध्यात्मिक स्मृति
इस महा मिलन का आयोजन सुसनेर नगर के लिए न केवल आध्यात्मिक सौभाग्य है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक आयोजन के रूप में स्मरणीय बन जाएगा। चारों संघों का एक स्थान पर मिलन होना अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी अवसर माना जा रहा है। नगरवासी बड़ी श्रद्धा से इस आयोजन की तैयारी में जुटे हुए हैं।

✨ सार्थक चिंतन
जब संतों के चरण नगर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो वह नगर केवल स्थान नहीं रह जाता — वह तप, त्याग और संयम की जीवंत पाठशाला बन जाता है। ऐसे अवसर केवल देखने के लिए नहीं होते, आत्मा को झंकृत करने के लिए होते हैं। आइए, इस मिलन को बाहरी आयोजन न मानें — भीतर के मौन में उतरने का निमंत्रण समझें।
– राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
(संपादक – जनमत जागरण)



