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जांच के नाम पर पंचनामा – “अब भी ताज मेडिकल बंद, पर जिम्मेदार आजाद !” मनीषा की मौत- जांच टीम मेडिकल के सामने फोटो खिंचवाकर सिर्फ औपचारिकता निभा गई”

➡️ झोलाछाप इलाज, विभागीय चुप्पी और सवालों के घेरे में जांच प्रक्रिया

🛑 कागज़ी डॉक्टर की सूई ने छीन ली गरीब की दुनिया 🔍 जांच टीम आई, बंद मेडिकल के सामने फोटो खिंचवाकर चली गई!

📍 जनमत जागरण सोयतकलां, 18 जून 2025

क्या गरीब की मौत का मूल्य सिर्फ “कागजात मंगवाएंगे” में समा जाएगा?

📌 घटना का संक्षिप्त विवरण: नगर के ताज मेडिकल स्टोर पर संचालक अजीज खान द्वारा दी गई इंजेक्शन और दवाओं से पीड़िता की हालत बिगड़ती चली गई। पहले जलन, फिर झटके और फिर गंभीर स्थिति में उसे झालावाड़, कोटा होते हुए इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन वहाँ भी उसे नहीं बचाया जा सका और उसकी मृत्यु हो गई।

👉 समीपस्थ ग्राम कंवराखेड़ी की 19 वर्षीय बहु मनीषा मालवीय की मौत एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाने के बाद हो गई। 👉 इलाज के नाम पर लापरवाही, और फिर मेडिकल स्टोर का गायब हो जाना – ये सब एक दिल दहला देने वाली सच्चाई को उजागर कर रहे हैं।

📋 जांच टीम के दौरे की औपचारिकता: 👉 3 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची – लेकिन मेडिकल दुकान बंद मिली। 👉 टीम ने पड़ोसी दुकानदारों से जानकारी ली और अजीज खान से फोन पर बात कर इतिश्री कर ली। 👉 टीम ने कहा – “हम कागज मंगवाएंगे, फिर जांच होगी।”

📢 प्राथमिक रिपोर्ट:

  • मृतका के परिजनों ने थाना सोयत में आवेदन दिया है।
  • ताज मेडिकल बीते शुक्रवार से बंद है।
  • अजीज खान फरार है, मेडिकल दुकान के शटर पर ताले हैं।

🧪 जांच टीम में सम्मिलित अधिकारी:

  • डॉ. मनीष कुरील, जिला स्वास्थ्य अधिकारी (अध्यक्ष)
  • डॉ. बी.बी. पाटीदार, बीएमओ
  • श्रीमती रोशनी धुर्वे, औषधि निरीक्षक
  • श्री आयुष पौराणिक, सदस्य

📌 जब इन अधिकारियों से पूछा गया कि क्लीनिक रजिस्टर्ड है या नहीं? तो जवाब मिला – “जांच होगी, देखेंगे, फिर आएंगे।”

📢 स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया: जब मीडिया द्वारा अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा – “हमें इस बारे में जानकारी नहीं थी, आपने बताया है तो हम कार्रवाई करेंगे।” वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा अब जांच शुरू की गई है, लेकिन अब तक FIR या ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं हैं।

⚠️ पूर्व की घटनाओं से सबक नहीं लिया गया! सुसनेर क्षेत्र में पहले भी नरबदिया, डाक बंगला और पांचपुलिया इलाकों में ऐसे ही झोलाछाप डॉक्टरों के कारण कई ग्रामीणों की मौतें हो चुकी हैं। उस वक्त भी जांच, पंचनामा, क्लीनिक सील जैसी औपचारिकताएं निभाई गईं, लेकिन कुछ महीनों बाद वही क्लीनिक फिर से चालू हो गए। इस बार भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है।

जनमत का सवाल: क्या ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों पर स्थाई और कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? क्या गरीब की ज़िंदगी इतनी सस्ती हो गई है कि उसकी मौत भी “रूटीन इनक्वायरी” में बदल जाए?

📸 जनता पूछ रही है:अगर कोई निर्दोष मौत का शिकार हुआ है, तो अब तक आरोपी डॉक्टर पर कड़ी कार्यवाही क्यों नहीं?”

🗣️ जनमत जागरण की आवाज़:हम चाहते हैं कि मनीषा की मौत सिर्फ एक आंकड़ा न बने, बल्कि इस पंचनामा से एक मिसाल पैदा हो – ताकि आगे कोई और गरीब बेटी झोलाछाप लापरवाही का शिकार न हो।”

🔴 अब देखने वाली बात यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन इस बार संवेदनशीलता से काम करेगा या फिर इस बार भी सबक भुला दिया जाएगा?”


🌿 सार्थक चिंतन

“एक सूई, एक झूठा इलाज – और एक गरीब बेटी की पूरी दुनिया उजड़ गई।
क्या मौत के बाद भी तंत्र की खामोशी हमें नहीं झकझोरती?
क्यों झोलाछाप या कागज़ी डॉक्टर खुलेआम ‘उपचार’ कर रहे हैं, जबकि गरीबों के पास दूसरा विकल्प नहीं होता?
क्या विभाग की बार-बार की चुप्पी और ढुलमुल कार्रवाई कहीं न कहीं इस मौत का भी जिम्मेदार नहीं?
आज ज़रूरत है ऐसी एक मिसाल की — जो सिर्फ जांच में ना उलझे, बल्कि व्यवस्था की रीढ़ सीधी करे।
मनीषा की चिता से उठता धुआं हर संवेदनशील नागरिक से यही सवाल पूछता है –
‘क्या अगली मनीषा को भी सिर्फ कागज़ और जांच नसीब होगी?’


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