“जनदबाव और जांच के बाद 9 दिन बाद ताज मेडिकल सील – मनीषा मौत प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग की पहली कार्रवाई”

🩺 मौत के नौ दिन बाद जागा प्रशासन, ताज मेडिकल एवं क्लिनिक हुआ सील
मनीषा मौत प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग की देर से हरकत… अब सवाल और भी गहरे हैं
सोयतकलां | 24 जून 2025 | जनमत जागरण
ग्राम कंवराखेड़ी की 19 वर्षीय बहु मनीषा बाई की मौत के 9 दिन बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और मंगलवार को नगर के सदर बाजार स्थित ताज मेडिकल एवं क्लिनिक को सील कर दिया गया। यह वही क्लिनिक है जहां से तथाकथित चिकित्सक अजीज खान ने मनीषा को इलाज दिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और इंदौर में उसकी मौत हो गई।
🛑 सीलिंग की कार्रवाई – लेकिन बहुत देर से
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष कुरील (DHO) के निर्देशानुसार यह कार्रवाई की गई।
डॉ. मुकेश जाट और उनकी टीम ने मौके पर जाकर ताज मेडिकल एवं क्लिनिक को विधिवत सील किया।
बीएमओ डॉ. बृजभूषण पाटीदार ने पुष्टि करते हुए बताया कि,
“जांच प्रारंभ हो चुकी है और आज DHO के निर्देश पर ताज मेडिकल को सील किया गया है।”
🧪 उपचार, इंफेक्शन और अंत में मौत
मनीषा के पति भेरूलाल मालवीय के अनुसार, 19 वर्षीय मनीषा को पेटदर्द की शिकायत पर अजीज खान से इलाज करवाया गया था।
इंजेक्शन लगने के बाद मनीषा को गठान, जलन और झटके की स्थिति बनी, जिसके बाद उसे झालावाड़, कोटा और अंततः इंदौर रेफर किया गया।
16 जून को मनीषा की मौत हो गई।
📝 थाने में दिया था शिकायती आवेदन
इलाज के दौरान ही पीड़ित पति ने सोयत थाना में अजीज खान के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई थी।
मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया और सुसनेर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया।
🧩 समझौते और सौदेबाज़ी की चर्चाएँ भी तेज
सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक जांच के दौरान ही “समझौता” और “सांठगांठ” जैसे शब्द बाजार में तैरने लगे थे।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई 9 दिन तक क्यों नहीं हुई, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं।
👉 क्या जांच टीमों ने इतने दिन आरोपीत को साक्ष्य हटाने का समय दिया?
👉 क्या ताज मेडिकल से जुड़े रिकॉर्ड, दवाइयां या कथित क्लिनिक की व्यवस्थाएं जांच से पहले ही हटा ली गईं?
💬 जनता का सवाल – अब क्या आगे कुछ होगा?
जनता पूछ रही है —
“क्या यह सीलिंग स्थायी है? या फिर यह भी कुछ दिनों बाद एक और ‘भूल जाओ’ केस बन जाएगा?”
💭 सार्थक चिंतन
“जब कानून की नजरें देर से खुलती हैं,
तो अपराधी सबूतों की कब्र पहले ही खोद चुका होता है।
मनीषा अब नहीं रही — लेकिन सवाल अब भी जिंदा हैं।
क्या इस बार भी सिस्टम सवालों से बच निकलेगा?”



