“मनीषा की मौत का मामला: पीड़ित पति ने कलेक्टर कार्यालय में लगाया न्याय की गुहार, ताज मेडिकल की सील तोड़ने पर उठे सवाल”

📰 “ताज मेडिकल मामला: मृतका के पति का कलेक्टर कार्यालय में आवेदन, आरोपित पर कार्रवाई की मांग”
📍 आगर-मालवा | 15 जुलाई 2025 | जनमत जागरण विशेष रिपोर्ट
“मनीषा की मौत के 30 दिन बाद भी न्याय की सील नहीं खुली, लेकिन आरोपित का मेडिकल बिना अनुमति खोला जा चुका है… सवाल यह है कि क्या अब भी पीड़ित की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी?”
नगर के समीपस्थ कंवराखेड़ी गांव की मृतका मनीषा बाई के पति भेरूलाल मालवीय ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक आवेदन प्रस्तुत कर आरोपित तथाकथित चिकित्सक अजीज खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भेरूलाल ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि उनकी पत्नी की मौत गलत इंजेक्शन लगाए जाने के कारण हुई थी और अब तक दोषियों पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई है।

📌 क्या लिखा है आवेदन में?
भेरूलाल ने अपने आवेदन में बताया कि 13 जून 2025 को उनकी पत्नी को पेट दर्द की शिकायत होने पर ताज मेडिकल क्लिनिक ले जाया गया था, जहां अजीज खान ने इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन के बाद मनीषा की तबीयत बिगड़ गई और उसे झालावाड़, कोटा होते हुए इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां 16 जून को उसकी मौत हो गई।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करते हुए ताज मेडिकल और क्लिनिक को 24 जून को सील किया, लेकिन बाद में बिना अनुमति के सील तोड़कर मेडिकल और क्लिनिक खोल दिया गया।
📌 बिना अनुमति के खुला ताज मेडिकल – बड़ा सवाल
12 जुलाई 2025 को शाम 4 बजे के बाद ताज मेडिकल एवं क्लिनिक को खुला पाया गया। जबकि जांच पूरी होने तक सीलिंग बरकरार रहनी थी। इस बारे में जब जनमत जागरण ने स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा तो उन्होंने चौंकाने वाले बयान दिए:
🗨️ डॉ. बृजभूषण पाटीदार (BMO सुसनेर) –
“बिना अनुमति के अगर संचालक अजीज खान ने मेडिकल खोला है तो यह गंभीर अपराध है। उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी और कार्रवाई होगी।”
🗨️ डॉ. दिनेश देहलवार (DHO आगर-मालवा) –
“मौखिक आदेश नहीं चलते। सील तोड़ना नियमों का उल्लंघन है। जांच के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।”

🗨️ ड्रग्स इंस्पेक्टर रोशनी जैन –
“(स्वास्थ्य खराब होने के कारण फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं, उनसे प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।)”
📌 पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
भेरूलाल ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि सोयतकलां थाने में 16 जून को मर्ग कायम किया गया था, लेकिन अब तक पुलिस ने भी किसी प्रकार की ठोस जांच नहीं की है। उन्होंने प्रशासन से न्याय दिलाने की अपील करते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह और भी कई मनीषाओं की मौत का कारण बन सकता है।
📌 नगर में उठ रहे सवाल
✔️ क्या स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की ढिलाई से आरोपित को साक्ष्य मिटाने का मौका मिल गया?
✔️ बिना अनुमति सील तोड़ने पर अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं हुई?
✔️ क्या मृतका के परिवार पर भी समझौते का दबाव बनाया जा रहा है?
🔥 संपादकीय टिप्पणी | “मौत का मामला या मौन का मामला?”
मनीषा की मौत पर प्रशासनिक ढिलाई और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी ने न्याय की उम्मीद को तोड़ दिया है। अब जबकि पीड़ित का परिवार खुद कलेक्टर कार्यालय पहुंचा है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और ज्यादा जरूरी हो गई है।
“अगर यह मामला भी फाइलों में दफन हुआ तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी हार होगी।”
📌 जनमत जागरण विशेष रिपोर्ट
👉 मनीषा के पति का आवेदन अब पूरे मामले को नए मोड़ पर ले आया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी सिर्फ कागजों का खेल खेलेगा या किसी की मौत को इंसाफ दिलाएगा?



