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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवाआस्था

हरियाली अमावस्या पर सालरिया गो अभयारण्य में हुआ विशेष सत्संग | साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने कहा – गोसेवा ही कलियुग में भगवत प्राप्ति का मूल मार्ग

इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का मूल साधन गोसेवा ही है – साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वत

सुसनेर, 24 जुलाई।
हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर गोसेवा, अध्यात्म और पर्यावरण चेतना का अनुपम संगम बुधवार को श्री कामधेनु गो अभयारण्य, सालरिया में देखने को मिला। विश्व के प्रथम गो अभयारण्य और मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित गौसेवा संस्थान में आयोजित गो कृपा सत्संग में हजारों गोभक्तों ने साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती जी के ओजस्वी उद्बोधन के माध्यम से गौमाता के दिव्य स्वरूप और कलियुग में गोसेवा के महत्व को आत्मसात किया।

साध्वीजी ने कहा कि – “इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का एकमात्र मूल साधन गोसेवा ही है। जहां-जहां गौमाता विराजती हैं, वहां सत्संग का फल कई गुना बढ़ जाता है। गोशाला में सत्संग और सेवा का अवसर परमात्मा की विशेष कृपा से ही प्राप्त होता है।”

नन्दी बाबा के बहाने समाज को दिया आत्मचिंतन का संदेश

साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती जी ने समाज की धार्मिक मानसिकता पर गहन प्रश्न उठाते हुए कहा कि – “आज लोग शिवालयों में पत्थर के नन्दी बाबा की पूजा कर रहे हैं, लेकिन वही सजीव नन्दी बाबा सड़कों पर भूखे घूम रहे हैं। भगवान शिव ने जिन नन्दी को पूजा, वही आज उपेक्षा का शिकार हैं। यह हमारी श्रद्धा का विचलन है।”

उन्होंने आगे कहा कि – “84 लाख योनियों में श्रेष्ठ मनुष्य योनि का उद्देश्य केवल भोग नहीं, बल्कि भगवत प्राप्ति है। और परमात्मा को पाने के लिए सहनशीलता, धैर्य और समर्पण की आवश्यकता है – जो केवल गोमाता की सेवा में ही विकसित हो सकती है।”

गौशाला है तपोभूमि – मृतप्राय भक्ति से बचना है तो गोसेवा से जुड़िए

साध्वीजी के अनुसार – “इस युग में जो भक्ति गोसेवा के बिना की जा रही है, वह मृतप्राय: है। भगवान को अगर पाना है तो मंदिरों के बजाय गोशालाओं की ओर रुख करना होगा। गोमाता दुःख सहन करती हैं, लेकिन उनका हर कष्ट मनुष्य के कल्याण के लिए लीला रूप में होता है। जब हम उनकी पीड़ा को देख भावुक हो उठते हैं, वही क्षण आत्मजागृति का होता है।”

सहभागिता और सम्मान

सत्संग के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उज्जैन विभाग के विभाग प्रचारक श्री हीरेंद्र सिंह जी, आगर जिला प्रचारक श्री राकेश मराठा सहित संघ के पदाधिकारियों ने गोमाता का पूजन व आरती की। श्री कामधेनु गो अभयारण्य के प्रबंध न्यासी डॉ. विक्रम सिंह जी ने अतिथियों का गोमाता की छवि और उपरना भेंट कर बहुमान किया। आज के यजमान श्री लाल सिंह जी (सालरिया) तथा आगामी भादवा अमावस्या के यजमान श्री भगवान सिंह जी (मोखमपुरा) ने पूज्य साध्वीजी से आशीर्वाद लिया। अंत में गोव्रती महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।


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