सालरिया ग्रामीणों ने गेट तोड़कर जबरन छोड़ा गोवंश, गो अभयारण्य में सेवा कार्य बाधित | SDM ने दिए कार्यवाही के निर्देश

🚫 गोसेवा स्थल पर जबरन घुसपैठ – सालरिया ग्रामीणों ने तोड़ा गो अभयारण्य का अनुशासन!
“गायों को जबरन छोड़ा, ग्वालों से झगड़ा – सेवा की भूमि को बना दिया संघर्ष का मैदान”
जनमत जागरण, सुसनेर | 29 जुलाई 2025
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जहाँ सेवा का भाव ही तप है, वहाँ जब संवेदनहीनता की छाया मंडराने लगे, तो गोसेवा जैसे पावन स्थल भी असंतुलन और अव्यवस्था का शिकार हो जाते हैं।
विश्व के प्रथम गो अभयारण्य – सालरिया स्थित यह स्थान, जहाँ हजारों गोवंशों की देखरेख व सेवा सतत चल रही है, आज प्रातः उस समय विचलित हो उठा जब कुछ ग्रामीणों ने अपने व्यवहार से व्यवस्था को चुनौती दे डाली।
🛑 जनमत जागरण @सुसनेर
प्रातः 10 बजे, सालरिया गांव के लगभग 50-60 ग्रामीण डंडे-लाठियाँ लेकर गो अभयारण्य के मुख्य द्वार पर पहुंचे। प्रहरियों को धमका कर गेट खुलवाया, अंदर जबरन सैकड़ों गोवंशों को छोड़ा और खड़ी फसल को रौंदते हुए गोसेवा में लगे ग्वालों से भी झगड़ा किया। यह सम्पूर्ण कृत्य अभयारण्य की पवित्रता और प्रशासनिक नियमों की खुली अवहेलना थी।
घटना की सूचना मिलने पर श्री मिलिंद डोके (एसडीएम आगर-बड़ौद), नायब तहसीलदार सुसनेर और थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण कर उन्होंने दोषियों पर आवश्यक कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए।

⚠️ पृष्ठभूमि और प्रशासन की स्थिति:
प्रबंधन ने बताया कि गो अभयारण्य की अधिकतम क्षमता 5000 गोवंश की है, जबकि वर्तमान में 7000 से अधिक गायों की सेवा की जा रही है।
28 जून 2025 को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित संचालन समिति बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बिना प्रशासनिक अनुमति कोई नया गोवंश प्रवेश नहीं करेगा।
फिर भी, ग्राम पंचायत के सरपंच पुत्र और सहायक सचिव गोपाल पुत्र जुझारसिंह के नेतृत्व में पहले भी धमकी दी गई थी कि गाएं जबरन अंदर छोड़ी जाएंगी। आज उसी धमकी को अमल में लाया गया।
🤔 क्या यह गोसेवा है या गो-राजनीति?
सेवा का स्थान यदि दबाव और अराजकता से भर जाए, तो केवल दीवारें टूटती नहीं, भरोसे भी दरकते हैं। ग्रामीणों की समस्या हो सकती है, लेकिन उसका समाधान प्रशासनिक संवाद और संवेदनशील सहयोग से संभव है — न कि तोड़फोड़ और भय फैलाकर।
📣 जनमत जागरण की ओर से अपील:
जनहित और गोहित की रक्षा तभी होगी, जब हम व्यवस्था का सम्मान करें। यदि हर गांव अपने गोवंश को जबरन कहीं भी छोड़ने लगे तो सेवा संस्थान अराजकता की चपेट में आ जाएंगे। यह समय सहमति और समाधान का है, संघर्ष और सनक का नहीं।



