“रक्षाबंधन पर्व पर संकल्प लें – आस्था की रक्षा कर धर्म निभाएं, साजिशों से डटकर राष्ट्र बचाएं।”

“राखी बने धर्म-राष्ट्र की ढाल – जनमत जागरण की रक्षाबंधन शुभकामना 🚩 जनमत जागरण परिवार की ओर से – ‘धर्म रहे अडिग, राष्ट्र रहे अभेद्य’
रक्षाबंधन – केवल एक पर्व नहीं, एक संकल्प
जनमत जागरण परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ
✍️ “जब समय के आकाश पर अंधकार के बादल घिरते हैं,
जब आस्था के दीपकों को बुझाने की साजिश होती है,
जब मातृभूमि की गोद में संस्कारों की जड़ों को काटने की कोशिश होती है—
तब एक रक्षा-सूत्र, एक संकल्प, एक जागरण ही वह शक्ति बनता है,
जो युगों तक धर्म और राष्ट्र की मर्यादा को थामे रखता है।”
भाइयों-बहनों का यह पावन पर्व केवल राखी बाँधने का दिन नहीं, बल्कि धर्म, राष्ट्र और संस्कारों की रक्षा का संकल्प दिवस है। आज जब सनातन आस्था पर कम्युनिस्ट और विधर्मी विचारधारा के षड्यंत्र लगातार बढ़ रहे हैं, जब लव जिहाद जैसी विकृत मानसिकता हमारे घर-परिवार की बेटियों पर हमला कर रही है, तब रक्षा-सूत्र का अर्थ केवल हाथ पर धागा बाँधना नहीं, बल्कि धर्म-संस्कृति की सुरक्षा की प्रतिज्ञा बन जाना चाहिए।
आज का रक्षाबंधन हमें स्मरण कराता है कि—
- हम अपनी बेटियों और बहनों की मर्यादा की रक्षा के लिए खड़े हों।
- सनातन धर्म के आस्था बिंदुओं, मंदिरों और परंपराओं की सुरक्षा के लिए सजग रहें।
- राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव पर कोई आंच न आने दें।
- धर्मविरोधी ताकतों के षड्यंत्रों को पहचानकर उनका साहसपूर्वक प्रतिकार करें।
आइए, इस रक्षाबंधन पर हम केवल कलाई में धागा न बाँधें, बल्कि हृदय में यह अटूट संकल्प बाँधें कि—
“हमारे रहते न धर्म पर आंच आएगी, न मातृभूमि पर; न हमारी संस्कृति झुकेगी, न हमारी बहनें असुरक्षित होंगी।”

जनमत जागरण परिवार सभी देशवासियों से आह्वान करता है—
👉 राखी का धागा आज से केवल रिश्तों का नहीं, बल्कि राष्ट्र और धर्म रक्षा का प्रतीक बने।
👉 इस पर्व को ‘संस्कृति रक्षा पर्व’ के रूप में मनाएं।
👉 10 से 15 अगस्त तक चलने वाली हमारी विशेष लेखमाला में जुड़े और विचार क्रांति का हिस्सा बनें।

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ
“धर्म रहे अडिग – राष्ट्र रहे अभेद्य”
✍️ लेखन एवं प्रस्तुति: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ – जागरूक स्वर, पत्रकार, शिक्षक, राष्ट्रवादी चिंतक

🛡️🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस विशेष लेख श्रृंखला – 10 अगस्त से 15 अगस्त तक 🇮🇳🛡️
“सोचिए… क्या भारत की आत्मा पर फिर हो रहा है हमला?”
जिस तंत्र ने नेपाल के सनातन मूल्यों को कुचला, वही तंत्र अब भारत की जड़ों पर प्रहार कर रहा है।
यह कोई संयोग नहीं, यह सुनियोजित साजिश है!
🔥 विचारधारा विशेष की घुसपैठ
🔥 राजनीति में राष्ट्र से ऊपर एजेंडा
🔥 भारत की संस्कृति, परंपरा और पहचान पर सुनियोजित प्रहार
यह लेख आपको सोचने पर मजबूर करेगा –
कि आजादी केवल संविधान की बात नहीं, संस्कृति की भी सुरक्षा है।
📅 प्रकाशन प्रारंभ: 10 अगस्त 2025
📰 जनमत जागरण पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर
🎯 प्रतिदिन विशेष लेख – 15 अगस्त तक
🔗 साथ जुड़िए… क्योंकि अब केवल तिरंगा लहराना ही काफी नहीं,
अब तिरंगे के भाव को समझना और बचाना ज़रूरी है!




