सोयतकलां में बायपास विवाद: जनता सड़कों पर उतरने को तैयार, प्रशासन पर सवाल

“नगर की अस्मिता की लड़ाई” –‘विकास चाहिए… विनाश नहीं’ – ‘बायपास बाहर निकालो संघर्ष समिति’ के अध्यक्ष बाबूलाल दांगी ने आंदोलन का ऐलान किया
“बायपास नगर के बाहर निकालो… संघर्ष समिति ने कलेक्टर के नाम राजस्व निरीक्षक को सौंपा ज्ञापन”
जनमत जागरण @ सोयतकलां: सोयतकलां में उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन बायपास को लेकर जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। नगर की आबादी के बीच बायपास निकालने के सर्वे को लेकर संघर्ष समिति ने प्रशासन को चेताया है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो चरणबद्ध आंदोलन में धरना, हड़ताल और आमरण अनशन तक किया जाएगा।
‘बायपास बाहर निकालो संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में बुधवार को नागरिकों ने जिला कलेक्टर, आगर मालवा के नाम राजस्व निरीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासन को अवगत कराया गया कि वर्तमान सर्वे में बायपास नगर की आबादी के बीच से होकर गुजर रहा है, जो कि जनहित के विपरीत और खतरनाक है।ज्ञापन के दौरान वार्ड नंबर 3 और 4 के प्रभावित सभी पीड़ितों सहित दर्जनों पीड़ित परिवार के लोग थे ।

ज्ञापन में कहा गया:
“वर्तमान सर्वे के अनुसार बायपास नगर की सीमा के अंदर से होकर गुजर रहा है, जिसमें वार्ड क्रमांक 3 और 4 तथा अस्पताल के पास का हिस्सा भी शामिल है। यह न केवल हास्यास्पद है, बल्कि जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”

संघर्ष समिति का तर्क:
नगर पहले से ही कंठाल और कालीसिंध नदी के बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यदि बायपास को ऊंचाई पर नगर के बीच बनाया गया, तो जलभराव और बाढ़ की समस्या कई गुना बढ़ जाएगी। यह नागरिकों के जीवन, किसानों की फसलों, अस्पतालों और स्कूलों के लिए संकट बन जाएगा।

डोंगरगांव की तर्ज पर बिगड़ सकते हालात ?
डोंगरगांव में बायपास को लेकर प्रशासन की लापरवाही पहले ही एक बड़ा आंदोलन जन्म दे चुकी है। वहाँ स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि धरने के बाद लोग भूख हड़ताल पर उतर आए हैं और यह आंदोलन एक सप्ताह से अधिक समय से जारी है। जागरण का मानना है कि यदि सोयतकलां के मामले में भी प्रशासन ने समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया, तो हालात यहाँ भी डोंगरगांव जैसे बिगड़ सकते हैं। दरअसल, दोनों मामलों की जड़ एक ही है – बायपास का सर्वे जनभावनाओं के खिलाफ और नगर की संवेदनशील सीमाओं में किया जाना। ऐसे में सुसनेर और आगर जिले के अन्य क्षेत्रों में जहां पहले ज्ञापन दिया जा चुके हैं वहां भी आंदोलन की चिंगारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है ?
हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन नगर के विनाश के पक्षधर भी नहीं – बाबूलाल दांगी का बयान:
संघर्ष समिति के अध्यक्ष बाबूलाल दांगी (अध्यक्ष – बायपास बाहर निकालो संघर्ष समिति एवं मध्य प्रदेश सरपंच संघ) ने कहा:
“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन नगर के विनाश के पक्षधर भी नहीं। जिस तरह बायपास का सर्वे नगर के बीच किया गया है, वह जनभावनाओं के खिलाफ है। हम प्रशासन से निवेदन नहीं, अब संघर्ष करेंगे। नगर के सम्मान और सुरक्षा के लिए आमरण अनशन तक जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा:
“नगरवासियों की यह लड़ाई सिर्फ सोयतकलां की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अस्मिता की लड़ाई है। सभी नागरिक इस संघर्ष में एकजुट होकर सामने आएं।”
प्रतिलिपि किन्हें भेजी गई?
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, एसडीएम सुसनेर, थाना प्रभारी सोयतकलां, एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर उज्जैन सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई।
संघर्ष समिति की चेतावनी:
यदि बायपास को 1.5 से 2 किलोमीटर नगर से दूर नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा।
📍 धरना स्थल: सोसायटी के पास, पिड़ावा रोड चौराहा, सोयतकलां
📢 आयोजक: बायपास बाहर निकालो संघर्ष समिति



