सिविल अस्पताल में सुरक्षा संकट: डॉक्टरों पर बढ़ते हमले, पुलिस चौकी की मांग फिर अनसुनी

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा दांव पर…
सिविल अस्पताल में पुलिस चौकी की मांग अनसुनी, डॉक्टरों पर बढ़ रहे हमले
जनमत जागरण@ सुसनेर। नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब सिविल अस्पताल का दर्जा पाकर साढ़े 8 करोड़ की भव्य बिल्डिंग में तो शिफ्ट हो गया है, लेकिन यहां काम करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी आज भी असुरक्षा की छाया में ड्यूटी करने को मजबूर हैं। आए दिन अस्पताल परिसर में दुर्व्यवहार, गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालात ये हैं कि स्टाफ को कई बार पुलिस थाने की शरण लेनी पड़ती है, लेकिन जब तक पुलिस पहुंचती है, तब तक उत्पाती तत्व आराम से निकल जाते हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगर परिसर में ही पुलिस चौकी की स्थायी तैनाती हो जाए तो इन घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन कई बार मांग करने के बाद भी जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।
युवक ने किया हंगामा, डॉक्टर से अभद्रता
गुरुवार शाम एक बार फिर हालात बिगड़े। रिछड़िया निवासी महिला ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसे डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया। कुछ देर बाद महिला का भाई ईश्वर सिंह अस्पताल पहुंचा और स्टाफ पर गाली-गलौज, अभद्रता और उत्पात करने लगा। ड्यूटी पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. अखिलेश कुमार बागी ने इसकी शिकायत थाने में दर्ज कराई। उनका कहना है—
“ऐसी घटनाएं रोज होती हैं। पुलिस जब तक पहुंचती है, तब तक आरोपी फरार हो जाते हैं। अस्पताल में पुलिस चौकी बेहद जरूरी है।”
वीरान पड़ी चौकी, अस्पताल में हो सकती है स्थापित

कभी हाथी दरवाजा क्षेत्र में असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण के लिए एक अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई थी। कुछ समय ड्यूटी के बाद यह चौकी वर्षों से वीरान पड़ी है। स्थानीय लोग और अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगर इस चौकी को अस्पताल परिसर में शिफ्ट कर दिया जाए और पुलिसकर्मी तैनात कर दिए जाएं तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और अस्पताल का माहौल दोनों सुधर सकते हैं।
जिम्मेदारों का पक्ष
डॉ. बी. बी. पाटीदार, बीएमओ सुसनेर
“अस्पताल में पुलिसकर्मी की तैनाती के लिए हम कई बार मांग कर चुके हैं। अगर चौकी बनती है तो हम पुलिस स्टाफ को रहने के लिए जगह भी उपलब्ध कराएंगे।”
केशर राजपूत, थाना प्रभारी सुसनेर
“सिविल अस्पताल में फिलहाल पुलिस चौकी नहीं है। स्टाफ की कमी है, लेकिन पर्याप्त बल मिलते ही अस्पताल प्रबंधन की मांग पर तैनाती की जा सकती है।”



