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“नवरात्रि महायज्ञ में महाराज का तीखा संदेश –”कोट नहीं, लंगोट वाले ही बचा सकते हैं गोमाता : बृज बिहारी सरकार”


🌸 गोमाता: सनातन संस्कृति की आत्मा और राष्ट्र की धड़कन 🌸

जबलपुर,सुसनेर,पुष्कर/25 सितम्बर : भारत की संस्कृति यदि किसी एक जीवात्मा में मूर्त रूप लेती है तो वह है गोमाता। वेदों में जिनका उल्लेख “गावो विश्वस्य मातरः” (गाय समस्त जगत की माता है) के रूप में हुआ, वही गौ माता आज भी सनातन संस्कृति की जीवनरेखा मानी जाती हैं। नवरात्रि के पावन पर्व पर चल रहे श्री गो संरक्षण महायज्ञ एवं दिव्य महा दरबार के चतुर्थ दिवस पर जब पूज्य बृज बिहारी सरकार अनिकेत कृष्ण शास्त्री जी ने यह उद्बोधन दिया कि “कोट पहनने वाले नहीं, बल्कि लंगोट पहनने वाले ही गोमाता को बचा सकते हैं” — तो पूरा परिसर गूंज उठा।

यह महज एक वाक्य नहीं, बल्कि उस तप और त्याग की पुकार है जो सनातन संस्कृति के रक्षकों ने युगों-युगों से दिया है।


✨ महाराज का साहित्यिक संवाद

महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा –
“हम कसाइयों को दोष देते हैं कि वे गो हत्या करते हैं, किंतु उससे बड़ा पाप तो हम सनातनी कर रहे हैं। हमने ही गोमाता को अपने घरों से बाहर निकाला है। यदि हम उन्हें घर में रखते तो वे कसाइयों के चंगुल में कभी न जातीं।”

उन्होंने आगे प्रश्न किया –
“जब वेदों में गोमाता को विश्व की माता कहा गया है, तो क्या हम उन्हें राष्ट्रमाता का पद नहीं दे सकते?”


🌿 गोसेवा के महान आयाम

महाराज ने श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक स्वामी दत्त शरणानंद जी महाराज की प्रेरणादायी गो सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 65 शाखाओं के माध्यम से 1,57,000 गोमाता की सेवा की जा रही है। इसी क्रम में ग्वाल संत स्वामी गोपालानंद जी महाराज की तपस्या और संकल्प की गाथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने आगर मालवा (मध्यप्रदेश) के सालरिया में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में एक वर्ष तक सतत गो महिमा कथा कराकर समाज में जागृति फैलाई।

स्वामीजी ने दाता देवी फाउंडेशन के माध्यम से 1008 आधुनिक गो चिकित्सालयों की स्थापना का संकल्प लिया है, जो देशभर में निःशुल्क औषधि, दाना एवं चारा उपलब्ध कराएंगे।


🐄 आधुनिक गोशाला का नया संकल्प

24 सितम्बर को नवरात्रि के पावन अवसर पर, राजस्थान के सालासर बालाजी धाम के समीप छापर नगर में एक दानदाता द्वारा प्रदत्त 3 हजार बीघा भूमि पर एक लाख गोमाता की मातृत्व भाव से सेवा हेतु विशाल गोशाला का शिलापूजन सम्पन्न हुआ।
इसके साथ ही, स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने देशभर में 5000 गो महिमा कथा प्रवक्ताओं को तैयार करने का संकल्प लिया, ताकि हर घर-घर तक गोमाता के प्रति श्रद्धा और सेवा का भाव पहुँचाया जा सके।


🚫 पशु बलि और धर्म का प्रश्न

महाराज ने पशु बलि का विरोध करते हुए कहा –
“हम देवताओं के नाम पर अपने स्वाद की पूर्ति हेतु पशु बलि करते हैं और कहते हैं कि हमारा धर्म इसकी अनुमति देता है। यदि यही धर्म है तो फिर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप भी तो क्षत्रिय थे। उन्होंने कभी किसी जीव को कष्ट नहीं दिया, बल्कि भारत माता की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।”

साथ ही महाराज ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गोमांस निर्यात पर GST माफी के निर्णय की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इसे वापस लेने की मांग की।


🙏 संत-महात्माओं का आशीर्वाद

चतुर्थ दिवस के आयोजन में जगतगुरु रामानुजाचार्य राजारामाचार्य जी महाराज, भगवताचार्य योगेंद्र जी (मंगल श्री फाउंडेशन), एवं आचार्य राम छवि जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन समिति ने उनका चरण पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

संतों ने कहा कि –
“यदि प्रत्येक सनातनी श्रद्धा और सेवा भाव से गोमाता की सेवा करे तो देश का एक भी गोवंश निराश्रित नहीं घूमेगा।”


🎶 भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण

अतिथि के रूप में पधारे ग्वाल सेवा संघ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शिवराज शर्मा ने गोमाता पर एक भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर सभा को भाव-विभोर कर दिया।


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