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गो नवरात्रि महामहोत्सव : आगर जिले के बडौद में 22 से 31 अक्टूबर तक होगा गो पर्यावरण और अध्यात्म चेतना का विराट आयोजन

🕉️ गोवर्धन पूजा से शुभारंभ होगा बरगडी गोशाला में “गो नवरात्रि महामहोत्सव”

“गो नवरात्रि विशेष शक्ति जागरण का महापर्व है” — स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ आगर-बडौद ।
धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना के संगम स्थल श्रीकृष्ण योगेश्वर गोधाम महातीर्थ बरगडी (बडौद) में इस वर्ष दीपावली के दूसरे दिन से आरंभ होने जा रहा “गो नवरात्रि महामहोत्सव” अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनने जा रहा है। 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता, श्री गोपाल परिवार संघ के संस्थापक एवं ग्वाल संत पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज के निर्देशन में यह आयोजन 22 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से अक्षय नवमी) तक होगा।


🌾 गो नवरात्रि — शक्ति, श्रद्धा और सात्त्विकता का अद्वितीय संगम

स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने गौसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि “गो नवरात्रि विशेष शक्ति जागरण का महापर्व है”, जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण में भी मिलता है। यदि यह पर्व पयोव्रत (दूधाहार व्रत) के साथ किया जाए, तो इसका फल अनंतगुणा होता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल उपासना नहीं, बल्कि ‘गौ, गंगा और गीता’ के माध्यम से चेतना जागरण का अभियान है।


📜 दिव्य आयोजन श्रृंखला — प्रतिदिन होगा साधना, सेवा और सत्संग का प्रवाह

आयोजन समिति द्वारा तय कार्यक्रमों के अनुसार प्रत्येक दिन प्रातः ब्रह्ममुहुर्त से लेकर रात्रि 10 बजे तक विभिन्न अध्यात्मिक व सांस्कृतिक आयोजन होंगे —

  • 🌅 प्रभातफेरी (सुबह 6 बजे) — गौसेवकों का समूहिक संकीर्तन एवं ग्राम जागरण।
  • 🙏 गौपूजन (सुबह 7 बजे) — वेद-विधि से गोमाता का पूजन-अर्चन।
  • 🔥 घृत से गो पुष्टि महायज्ञ (सुबह 8 से 11 बजे तक) — भारतीय वेद लक्षणा गोमाता के घृत से यज्ञ।
  • 📖 श्री गो कृपा कथा (दोपहर 12 से 3 बजे तक) — गोमाता की कृपा और धर्म पर आधारित कथा श्रृंखला।
  • 🌺 महा दरबार (3:30 से 5:30 बजे तक) — पूज्य श्री बृज बिहारी सरकार अनिकेत कृष्ण जी महाराज का दिव्य प्रवचन व सान्निध्य।
  • 🕉️ संध्याकालीन सत्संग (शाम 7 बजे से) — “जीवन सूत्र” गीता प्रवचन, भजन संध्या, अखंड सुरभि सत्संग और जप अनुष्ठान।

इसके साथ ही गोवर्धन पूजा, गोपाष्टमी पर्व, गोचारण लीलाएँ तथा पयोव्रत के अनुष्ठान भी विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे।


🙌 संत समाज, जनप्रतिनिधि और गौसेवक होंगे सहभागी

आगर मालवा सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से सैकड़ों गौसेवक, संत-महात्मा और समाजसेवी इस महायज्ञ में सम्मिलित होंगे। आयोजन में प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति भी प्रस्तावित है, जिससे “गो नवरात्रि” एक राष्ट्रीय अध्यात्मिक महाकुंभ का स्वरूप ले रहा है।


🕊️ समर्पण और संकल्प का संदेश

आगर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर और झालावाड़ जिलों के 50 से अधिक गांवों से सैकड़ों कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुए। संचालन श्रीराम शर्मा झारड़ा ने किया। अंत में समिति पदाधिकारियों द्वारा गो नवरात्रि महामहोत्सव का पोस्टर विमोचन किया गया तथा सभी उपस्थित जनों ने गोव्रती महाप्रसादी ग्रहण की।


🌼 “गौ माता — चेतना की अधिष्ठात्री शक्ति”

स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन के समापन में कहा —

“जैसे नवरात्रि में शक्ति स्वरूपा मातृशक्ति की उपासना होती है, वैसे ही ‘गो नवरात्रि’ में गोमाता की आराधना से पृथ्वी, प्राण और परंपरा — तीनों की रक्षा होती है। यह केवल पूजा नहीं, एक सृष्टि पुनरुत्थान का यज्ञ है।”


✍️ सार्थक दृष्टिकोण

“गो नवरात्रि : शक्ति, संवेदना और सृष्टि पुनरुत्थान का महामंत्र”

(लेखक – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’)

गो नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के मूल तत्वों की पुनर्स्मृति है। जिस प्रकार सामान्य नवरात्रि में मातृशक्ति की आराधना होती है, उसी प्रकार गो नवरात्रि में गौमाता को धरती की जीवंत शक्ति और सृष्टि की चेतना के रूप में पूजित किया जाता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रकृति, प्राण और संस्कृति – तीनों का आधार गोमाता में निहित है।

स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी के शब्दों में —

“गो नवरात्रि विशेष शक्ति जागरण का महापर्व है, और पयोव्रत के साथ किया गया यह साधना-क्रम आत्मा को सात्त्विकता और शांति से भर देता है।”

वेदों में गाय को ‘अघन्या’ कहा गया है — अर्थात् जिसका नाश न किया जाए। यह केवल जैविक जीवन की संवाहिका नहीं, बल्कि संवेदना की अधिष्ठात्री शक्ति है। जब हम गोमाता की सेवा करते हैं, तब हम अपने भीतर की करुणा और कृतज्ञता को जाग्रत करते हैं।

बरगडी गोधाम में आरंभ हो रहा गो नवरात्रि महामहोत्सव इसी चेतना का उत्सव है —
जहां यज्ञ में घृत की आहुति के साथ मनुष्य अपने अहंकार की आहुति भी देता है;
जहां भक्ति का प्रवाह और प्रकृति के प्रति आभार एक साथ प्रवाहित होते हैं।

आज जब विश्व जलवायु संकट, मानसिक असंतुलन और सामाजिक विखंडन से जूझ रहा है, तब गो नवरात्रि का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है —
कि सृष्टि की रक्षा तभी संभव है जब हम संवेदना को पुनः जागृत करें।

गो नवरात्रि हमें यह भी सिखाती है कि
विकास का मार्ग विनाश से नहीं, संरक्षण से गुजरता है।
और यही सच्चा धर्म है — जो जीवन के प्रति आदर और धरती के प्रति आभार में प्रकट होता है।


🌿 सार्थक चिंतन:

“गो नवरात्रि में पूजित होती है न केवल गाय, बल्कि हमारे भीतर का वह भाव —
जो जीवन को प्रेम, करुणा और सहयोग से भर देता है।”


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