“संघ शताब्दी वर्ष: डॉ. हेडगेवार जयंती पर संघ का आयोजन, इंदौर में 540 शिशु स्वयंसेवकों का प्रदर्शन, नागेंद्र वशिष्ठ ने किया प्रबोधन”

“इंदौर में संघ का शिशु स्वयंसेवक प्रकट कार्यक्रम सम्पन्न, नागेंद्र वशिष्ठ ने दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश”
✍️ इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित शिशु स्वयंसेवकों के प्रकट कार्यक्रम में राष्ट्रभाव, संस्कार और अनुशासन का प्रेरणादायी संगम देखने को मिला। इस अवसर पर वक्ताओं ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए नन्हे स्वयंसेवकों को जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
जनमत जागरण @ इंदौर। “राष्ट्र प्रथम का ध्येय ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल उद्देश्य है।” यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र के बौद्धिक प्रमुख श्री नागेंद्र जी वशिष्ठ ने शिशु स्वयंसेवकों के ‘नवसृजन’ प्रकट कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि वे जन्मजात देशभक्त थे। एक प्रसंग में उन्होंने इंग्लैंड की रानी के राज्यारोहण पर बांटी जा रही मिठाई को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि “जिसने हमारे देशवासियों को पीड़ा दी, उसकी खुशी में सम्मिलित होना जहर के समान है।” यह उदाहरण बताता है कि उनके जीवन के प्रत्येक क्षण में राष्ट्र सर्वोपरि था।

संस्कारों का संदेश
श्री वशिष्ठ ने उपस्थित शिशु स्वयंसेवकों को जीवन मूल्यों का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान करना प्रत्येक बालक का प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने अवगुणों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा—
“क्रोध वह हवा है, जो बुद्धि के दीपक को बुझा देती है और घृणा से ईर्ष्या उत्पन्न होती है।”
संगति के महत्व पर उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में सही वातावरण और साथ अत्यंत आवश्यक है—
“बालक का संग, बाजे मृदंग की तरह उसके व्यक्तित्व को गढ़ता है।”
कार्यक्रम का उद्देश्य और परंपरा
यह कार्यक्रम संघ संस्थापक पूजनीय डॉ. हेडगेवार जी के जन्मदिवस के निमित्त आयोजित किया गया। उनका जन्म वर्ष प्रतिपदा को हुआ था, जबकि अंग्रेजी तिथि अनुसार यह 1 अप्रैल को आता है। उन्होंने संघ की पहली शाखा नन्हे बालकों के साथ प्रारंभ की थी, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिशु स्वयंसेवकों का यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

भव्य सहभागिता
कार्यक्रम में 500 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। इसके लिए इंदौर विभाग के 36 नगर एवं खंड इकाइयों की 196 से अधिक शाखाओं में लंबे समय से अभ्यास चल रहा था, जिसमें 1200 से अधिक स्वयंसेवक जुड़े रहे।
निर्धारित मानकों को पूर्ण करते हुए इस प्रकट कार्यक्रम में 540 शिशु स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लेकर विभिन्न शारीरिक कौशल, अनुशासनात्मक गतिविधियों एवं बौद्धिक कार्यक्रमों का सामूहिक प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित समाजजनों ने सराहा।
कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक एवं समाज के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
संघ का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रभाव, संस्कार और अनुशासन की वह जीवंत पाठशाला है, जहां नन्हे स्वयंसेवक अपने उज्ज्वल भविष्य के साथ राष्ट्र निर्माण की दिशा में पहला सशक्त कदम बढ़ाते दिखाई देते हैं।



