शताब्दी वर्ष में मंडल-बस्ती को धुरी बनाकर प्रत्येक हिंदू तक पहुंचेगा संघ विचार : विनीत नवाथे
मालवा प्रांत की वार्षिक बैठक रतलाम में प्रारंभ, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन और युवा जागरण पर रहेगा विशेष फोकस

जनमत जागरण @रतलाम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में मंडल-बस्ती को कार्य की धुरी तथा शाखा-बस्ती को आधार बनाकर प्रत्येक हिंदू परिवार तक संघ विचार पहुंचाने और समाज की सज्जन शक्ति को संगठित करने का व्यापक अभियान चलाया जाएगा। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के प्रांत कार्यवाह श्री विनीत नवाथे ने रतलाम में आयोजित प्रांत की वार्षिक बैठक के उद्घाटन सत्र में वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कही।
तीन दिवसीय प्रांत बैठक का शुभारंभ माननीय प्रांत संघचालक श्री प्रकाशजी शास्त्री एवं प्रांत कार्यवाह श्री विनीत नवाथे ने भारत माता पूजन के साथ किया। 12 जून की सायंकाल प्रारंभ हुई यह बैठक 14 जून तक चलेगी, जिसमें प्रांत कार्यकारिणी, विभाग कार्यकारिणी तथा जिला टोली के कार्यकर्ता सहभागी हो रहे हैं।
श्री नवाथे ने बताया कि संघ ने प्रत्येक ग्राम और मोहल्ले में सक्रिय हिंदू टोली के निर्माण तथा समाज की सज्जन शक्तियों को संगठनात्मक कार्य से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पंच परिवर्तन के संकल्प को स्वयंसेवकों, शाखाओं और परिवारों तक पहुंचाने के लिए गत वर्ष से ही व्यापक प्रयास प्रारंभ किए गए हैं।
कार्यस्थिति
मालवा प्रांत के 1,359 ग्रामीण मंडलों में से 1,269 मंडल शाखायुक्त हैं, जबकि शेष 90 मंडलों में साप्ताहिक मिलन या मासिक मंडली संचालित हो रही है। 23 ग्रामीण जिलों में से 17 पूर्ण जिले तथा 138 खंडों में से 96 पूर्ण खंड हैं। प्रांत के 12,885 ग्रामों में से 6,509 ग्राम कार्ययुक्त हैं। 41 महानगरीय नगरों सहित 117 में से 116 अन्य नगर शाखायुक्त हैं। 968 बस्तियों में से 953 बस्तियां शाखा या मिलनयुक्त हैं। इस वर्ष 246 नए शाखा स्थानों की वृद्धि के साथ कुल शाखा स्थानों की संख्या 3,292 हो गई है।
विजयादशमी उत्सव और संचलन
संघ के शताब्दी वर्ष का शुभारंभ विजयादशमी उत्सव एवं संचलनों के साथ हुआ। प्रांत के 1,472 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में 45,075 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इन संचलनों में 1,333 मंडलों और 969 बस्तियों का प्रतिनिधित्व रहा। 142 नगरों में आयोजित बाल संचलनों में 34,878 बाल स्वयंसेवक सम्मिलित हुए।
वृहद गृह संपर्क अभियान
संघ विचार को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से 12,246 ग्रामों और 969 बस्तियों में व्यापक गृह संपर्क अभियान चलाया गया। इस दौरान स्वयंसेवक 32 लाख परिवारों तक पहुंचे। प्रत्येक परिवार को संपर्क पत्रक और स्टीकर प्रदान किए गए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 20 लाख घरों में भारत माता का चित्र वितरित किया गया।
सामाजिक सद्भाव और हिंदू सम्मेलन
प्रांत के 112 खंडों एवं 59 नगरों में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठकों में 462 महिलाओं सहित 10,840 समाजजन सहभागी हुए। प्रांत स्तरीय सामाजिक सद्भाव बैठक में 111 समाजों के 285 प्रमुख जनों को पूजनीय सरसंघचालक जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
विभिन्न हिंदू सम्मेलनों में 20,87,087 परिवारों तथा 68,55,559 समाजजनों की सहभागिता रही। 2,521 संतों के सान्निध्य में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण केंद्रित जीवनशैली, स्वदेशी व्यवहार और नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लिया गया।
युवा जागरण पर विशेष बल
युवा कार्यक्रमों के अंतर्गत 439 बस्तियों और 121 नगरों में आयोजित राष्ट्र साधना एकत्रीकरण में 5,736 स्वयंसेवक सहभागी हुए। 276 परिसरों में व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किए गए। 20 स्थानों पर समर्थ राष्ट्र दौड़ में 3,460 युवाओं ने भाग लिया, जबकि 171 युवा संगम कार्यक्रमों में 72,314 युवाओं की उपस्थिति रही। युवा शिविरों में 1,336 युवा सम्मिलित हुए।
यंग थिंकर्स कॉन्फ्लुएंस, युवा महोत्सव, युवा संसद तथा भारत शिखर सम्मेलन जैसे कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
अन्य प्रमुख गतिविधियां
भूमि सुपोषण अभियान के अंतर्गत 31 हजार से अधिक समाजजनों ने धरती माता का पूजन किया। स्वबोध की स्थापना के उद्देश्य से तीन दिवसीय नर्मदा साहित्य मंथन का आयोजन किया गया। शताब्दी वर्ष के विषयों पर केंद्रित प्रवासी भारतीय परिवार मिलन तथा संघ गीतों की प्रस्तुति पर आधारित ‘आदरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।



