“देवों का वैभव नश्वर, तीर्थंकरों का पद शाश्वत” : मुनि श्रमण सागर

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन । “इंद्र का पद और देवों का वैभव भी नश्वर है, शाश्वत तो केवल वीतराग तीर्थंकरों का पद है।” यह उद्गार मुनि श्री श्रमण सागर जी महाराज ने सिद्धचक्र मंडल विधान एवं जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत भगवान आदिनाथ के जन्मकल्याणक अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को देवी-देवताओं का नहीं, बल्कि देवों के भी देव देवाधिदेव अरिहंत भगवान का उपासक बनना चाहिए।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य एवं नवाचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री श्रमण सागर एवं मुनि श्री ओंकार सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित महोत्सव में गुरुवार को 512 अर्घ्य समर्पित कर भगवान आदिनाथ का जन्मकल्याणक हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
इंद्र ने की जन्म घोषणा, भक्तों में छाया उत्साह
सौधर्म इंद्र के पात्र अशोक कुमार तंबाकू वाला ने ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान के जन्म की घोषणा की। इसके बाद माता मरुदेवी एवं राजा नाभिराय के दरबार का आकर्षक मंचन किया गया। 56 कुमारिका देवियों ने माता मरुदेवी की सेवा का भावपूर्ण एवं मनोहारी प्रदर्शन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सच्ची शरण केवल तीर्थंकरों के चरणों में : मुनिश्री
मंगल प्रवचन में मुनि श्री श्रमण सागर जी ने कहा कि लौकिक पद, प्रतिष्ठा और वैभव क्षणिक हैं। मनुष्य यदि आत्मकल्याण चाहता है तो उसे वीतरागी तीर्थंकरों की आराधना एवं उनके बताए मार्ग पर चलना होगा। यही जीवन का वास्तविक धर्म और मोक्ष का पथ है।
ढोल-ढमाकों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
जन्मकल्याणक के उपलक्ष्य में त्रिमूर्ति मंदिर परिसर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इंद्र-इंद्राणियों एवं समाजजनों ने नृत्य कर भगवान के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। मंगल गीतों एवं जयघोषों से पूरा वातावरण धर्ममय बना रहा।
पांडुकशिला पर 1008 कलशों से हुआ महामस्तकाभिषेक
प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में सुमेरु पर्वत की प्रतीक पांडुकशिला पर जन्माभिषेक महोत्सव संपन्न हुआ। सौधर्म इंद्र-इंद्राणी तथा लाभार्थी राकेश कुमार, मनोज कुमार अमरकोट एवं मनीष जैन खुपवाला परिवार द्वारा बाल स्वरूप आदि कुमार को विराजमान कर 1008 कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा पंडाल “आदिनाथ भगवान की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
इंद्रसभा में झूला पालना, हुए सांस्कृतिक आयोजन
रात्रि में आयोजित इंद्रसभा में इंद्र-इंद्राणियों के नृत्य, देव स्तुति, बधाई गीत एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। बालक आदि कुमार का पालना झुलाया गया तथा बाल लीलाओं एवं तांडव नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। लाभार्थी विनोद कुमार परिवार द्वारा महाआरती संपन्न की गई।
भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को दिया कर्मयोग का मार्ग
प्रतिष्ठाचार्य मुकेश जैन शास्त्री ने बताया कि भगवान आदिनाथ के जन्म के साथ ही कर्मभूमि का प्रारंभ हुआ था। उन्होंने मानव समाज को असि, मसि, कृषि, विद्या, शिल्प एवं वाणिज्य जैसे छह प्रमुख कर्मों का ज्ञान देकर सभ्यता के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
शुक्रवार को तप कल्याणक एवं दीक्षा संस्कार
त्रिमूर्ति ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी दीपक जैन ने बताया कि शुक्रवार को 1024 अर्घ्यों के साथ मंडल विधान का समापन होगा। तप कल्याणक अवसर पर मुनि श्री श्रमण सागर जी महाराज के सानिध्य में आदि कुमार का दीक्षा संस्कार भी संपन्न कराया जाएगा।
मुनि संघ का किया सम्मान
कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी सौरभ जैन, विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुकेश तिवारी, संकुल प्राचार्य राधेश्याम शर्मा सहित जैन पत्रकार संघ के प्रतिनिधियों ने मुनि संघ को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।



